बहुत बार हमने देखा है कि किसी बहस में कोई व्यक्ति जब पूरी तरह गलत हो लेकिन फिर भी वे खुद को सही मानता है। ऐसे में आपको भी बहुत गुस्सा चढ़ता है। एक्सपर्ट्स ने इसके पीछे की वजह को समझा है, उनके द्वारा की गई स्टडी के मुताबिक पता चला है कि लोग अक्सर ये मान लेते हैं कि उनके पास सही फैसला लेने के लिए पूरी जानकारी है, भले ही उनके पास न हो।

एक्सपर्ट का कहना है कि हमारा दिमाग ये मानने में ओवरकॉन्फिडेंट होता है कि वे बहुत कम जानकारी से भी एक सही फैसले पर पहुंच सकता है। अध्ययन से ये समझ आया कि लोग बहुत जल्दी किसी फैसले पर पहुंच जाते हैं और जो जानकारी उनके पास होती है, उसी के आधार पर अपनी राय बना लेते हैं।

क्या दूसरों के विचारों का असर किसी और पर पड़ सकता है?

स्टडी 1300 लोगों पर की गई और इनकी राय भी लगी गई,जो उनकी खुद की थी। जो उन्हें तर्क पढ़ने को दिए गए थे उनके हिसाब से उन्होंने राय दी, लेकिन जब उन्हें विरोधी पक्ष की जानकारी दी गई, तो कई लोग अपना विचार बदलने के लिए तैयार हो गए। एक्सपर्ट्स का मानना था कि लोग अपनी राय पर अड़े रहेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अगर उन्हें कोई नई जानकारी मिलती है जो उन्हें रिलेवेंट लगती है, तो वे अपना विचार बदलने के लिए तैयार हो जाते हैं।

ऐसे में पता चलता है कि जब तक जितनी जानकारी किसी के पास है वे उसी के आधार पर अपने आप को समझदार समझता है, लेकिन अगर उसे और ज्यादा जानकारी देें तो वे अपना मत बदलने के लिए राजी भी हो सकता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

By tnm

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