एक तरफ जहां उत्तर भारत के लोग भीषण गर्मी से परेशान है वहीं दूसरी तरफ दक्षिण भारतीय राज्य केरल में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश और जलजमाव की वजह से लोगों का जीवन काफी प्रभावित हुआ है। वहीं जलजमाव और बारिश की वजह से केरल में कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लमस बढ़ रही है। इन्हीं समस्याओं से केरल के कुछ जिलों में लेप्टोस्पायरोसिस नामक बीमारी के मामले भी काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि इस बीमारी के बारे में शायद ही किसी को पता हो। लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केरल राज्य में लेप्टोस्पायरोसिस के कारण अब तक 41 लोगों की जान चली गई है। ऐसे में लोगों को इस बीमारी के बारे में जानना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं क्या है यह बीमारी, इसके लक्षण क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
सबसे पहले जानते हैं क्या है लेप्टोस्पायरोसिस
लेप्टोस्पायरोसिस एक ऐसी बीमारी है जो लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया के कारण होती है। वहीं यह बीमारी इंसानों और जानवरों दोनों के बीच फैलने वाली बीमारी है। वहीं आप स्किन में खरोंच या कट के माध्यम से, या अपनी आंखों, नाक या मुंह के जरिए लेप्टोस्पाइरा से संक्रमित हो सकते हैं। संक्रमित जानवरों के पेशाब या प्रजनन तरल पदार्थ के सीधे संपर्क में आने से भी आप इस बीमारी के चपेट में आ सकते हैं। हालांकि यह बीमारी दूषित पानी के संपर्क में आने से काफी तेजी से फैल सकता है। समय रहते इसके लक्षणों पर ध्यान न देने और इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
क्या है इसके लक्षण
लेप्टोस्पायरोसिस की लक्षण की बात करें तो तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और मतली और आंखों से पानी आना और जलन होना है। साथ ही ठंड लगना, दस्त लगना, भूख कम लगना, पीलिया, सांस लेने में तकलीफ होना और नाक से खून बहना भी इसके लक्षण है। वहीं अगर आप में ये सभी लक्षण दिखे तो इसे सामान्य समझने की गलती न करें और डॉक्टर से एक बार सलाह जरूर लें।
लेप्टोस्पायरोसिस से बचने के लिए इन टिप्स को फॉलो करें
इस संक्रमण से बचने के लिए दूषित पानी के नजदीक न जाएं, पूल, तालाब और नदी में जाने से बचें और संक्रमित जानवरों से दूर रहें। वहीं आप साफ पानी पिएं और अपने आसपास साफ-सफाई खास ध्यान रखें। साथ ही अगर आपके स्किन पर किसी तरह का घाव है तो उसे ढक कर रखें।
