रिसर्चर्स अक्सर ऐसी खोजें करते रहते हैं जिन्हें देखकर आम जनता सोच भी गहरी सोच में पड़ जाती है। अब नए शोध में एक्सपर्ट्स ने सुझाव दिया है कि किसी व्यक्ति के गाल के अंदर मौजूद कोशिकाएं स्टीक रुप से भविष्यवाणी करने में सक्षम हो सकती हैं कि अपने आने वाले वर्षों में उसे मृत्यु का खतरा कितना है। यह अध्ययन 1 अक्तूबर को फ्रंटियर्स इन एंजिंग नाम की पत्रिका में प्रकाशित हुआ है और इसने चीकएज का सर्मथन किया है। चीकएज एक नया उपकरण है जो किसी व्यक्ति के गाल या बक्कल के सैंपल्स का इस्तेमाल करके साल में उसके मृत्यु के जोखिम का अनुमान लगा सकता है।
शोध में लिए गए इतने लोग
इस स्टडी में एडल्ट के ऐसे ग्रूप्स लिए गए जिनकी उम्र 69-101 साल के थे। इन सभी के मृत्यु के जोखिम को देखने के लिए परीक्षण किया गया और चीकएज ने दिखाया कि अगले 12 महीनों में उनकी मृत्यु के जोखिम में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

आखिर क्या है चीकएज?
मनुष्यों के लिए एक नई आयु मृत्यु घड़ी चीकएज एक तरह की एपिजेनेटिक घड़ी है जो एक उपकरण है जो किसी व्यक्ति के डीएनए और उससे जुड़े रासायनिक पैटर्न का अध्ययन करके उसकी जैविक आयु को मापता है। कैलिफोर्निया के नोवाटो में बक इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन एजिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डेविड फुरमैन ने कहा कि बहुत से मामलों में जैविक आयु किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य के बारे में इस ग्रह पर उसके द्वारा जिए गए वर्षों से कही ज्यादा बताते हैं। चीकएज जैसे उपकरणों से जैविक उम्र बढ़ने को रोकने या लोगों को उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद मिल सकती है।वैज्ञानिकों ने चीकएज को इस तरह से बनाया है कि इसमें 18-93 साल की आयु के लोगों के गालों के स्वाब का इस्तेमाल होता है। यह उपकरण गाल की कोशिकाओं में मौजूद डीएनए मिथाइलेशन के पैटर्न को जोड़ता है और शैक्षिक और बीएमआई और व्यक्ति के तनाव के स्तर जैसे कारकों पर विचार करने के बाद स्वास्थ्य के लिए एक समग्र स्कोर देता है इसलिए किसी व्यक्ति का चीकएज स्कोर उसकी स्वास्थ्य स्थिति और जैविक उम्र बढ़ने की डिग्री पर निर्भर करता है।
वैज्ञानिक भी हुए हैरान
पहले अध्ययन के लेखक मैक्सिम शोखिरेव ने लाइव साइंस से बात करते हुए कहा कि – ‘हमें यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि चीकएज ने एक अलग टिश्यू में इतना अच्छा काम किया। इससे यह संकेत मिला कि चीकएज उन स्वास्थ्य संकेतों को पहचान रहा है जो अलग-अलग ऊतकों के प्रकारों के बीच संरक्षित है’। उन्होंने कहा कि – ‘हम यह अनुमान नहीं लगा सकते हैं कि कोई एक व्यक्ति के साल के अंदर जीवित रहेगा या फिर मर जाएगा लेकिन हम सभी कारणों से होने वाले मृत्यु दर में वृद्धि या फिर कमी देख सकते हैं’। यह निर्धारित करने के लिए और ज्यादा शोध की जरुरत है कि क्या यह टेस्ट किसी व्यक्ति के अन्य स्वास्थ्य परिणामों जैसे कि आयु संबंधी बीमारी की भविष्यवाणी कर सकता है। यूसीएलए में मानव आनुवंशिकी और जैव सांख्यिकी के प्रोफेसर स्टीव होर्वार्थ ने कहा कि – ‘एपिजेनेटिक घड़ियों को बनाने का प्राथमिक लक्ष्य उन हस्तक्षेपों की पहचान करना है जो इन जन्मजात उम्र बढ़ने के तंत्रों को प्रभावित या फिर धीमा कर सकते हैं’।

