विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में भारत को ट्रेकोमा, एक बैक्टीरिया से होने वाले आंखों के संक्रमण, को समाप्त करने के लिए बधाई दी है। यह संक्रमण, जो क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस बैक्टीरिया के कारण होता है, अंधेपन का कारण बन सकता है और इसका प्रभाव स्थायी हो सकता है। भारत ने इस उपलब्धि को हासिल करके नेपाल, म्यांमार और पाकिस्तान के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया का चौथा देश बन गया है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार अब ट्रेकोमा एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या नहीं रही, जो कि एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

जानें इस कामयाबी के पीछे का राज

भारत सरकार और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप यह सफलता प्राप्त हुई है। डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रीय निदेशक, साइमा वाजेद ने कहा, भारत की सफलता उसकी सरकार के मजबूत नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने इस बात की प्रशंसा की कि कैसे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने ट्रेकोमा को रोकने के लिए अथक मेहनत की।

क्या है ट्रेकोमा

ट्रेकोमा एक उष्णकटिबंधीय रोग है, और इसके बारे में भारत को 1950 और 1960 के दशक में एंडेमिक के रूप में जाना जाता था। हालांकि, अब स्वास्थ्य मंत्रालय के सर्वेक्षणों के अनुसार भारत में ट्रेकोमा और उससे संबंधित अंधेपन का कोई हालिया सबूत नहीं है। केंद्र सरकार ने बच्चों में संक्रामक ट्रेकोमा और सक्रिय ट्रेकोमा से देश को मुक्त घोषित किया है।

2014 से 2017 तक किए गए राष्ट्रीय ट्रेकोमा प्रसार सर्वेक्षणों के परिणामों से पता चला कि सक्रिय ट्रेकोमा का समग्र प्रसार केवल 0.7 प्रतिशत था। यह संख्या भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की सफलता को दर्शाती है। डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि भारत ने ट्रेकोमा के खिलाफ लड़ाई में न केवल अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है, बल्कि उसने समुदाय के स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए हैं।

भारत को मिला सार्वजनिक स्वास्थ्य पुरस्कार

साइमा वाजेद ने समारोह में भारत को ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य पुरस्कार’ प्रदान करते हुए कहा कि “लोगों को साफ पानी पीने, साफ रहने और चेहरा धोने के लिए प्रोत्साहित करना बहुत महत्वपूर्ण है।” यह सुझाव उन उपायों में से एक है जो ट्रेकोमा की रोकथाम के लिए आवश्यक हैं।

भारत ने इस उपलब्धि के माध्यम से न केवल राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल कायम की है। डब्ल्यूएचओ के प्रशंसा पत्र के अनुसार, “भारत ने 2024 तक ट्रेकोमा को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त कर दिया है।” यह भारत के लिए गर्व का क्षण है और एक नई दिशा का संकेत भी, जिसमें अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

इस सफलता ने न केवल ट्रेकोमा के खिलाफ भारत की लड़ाई को उजागर किया है, बल्कि यह दिखाता है कि सही नीतियों, जागरूकता और समुदाय के सहयोग से कैसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को समाप्त किया जा सकता है। भारत की यह उपलब्धि वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के लिए एक सकारात्मक संकेत है कि हम सामूहिक रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

इस प्रकार, भारत ने ट्रेकोमा के खिलाफ अपनी मेहनत से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है, जो भविष्य में अन्य स्वास्थ्य मुद्दों के समाधान में भी सहायक सिद्ध होगा।

By tnm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *