स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर के बाद महिलाओं में सबसे अधिक होने वाला कैंसर है। आधुनिक समय में जब महिलाएं कम समय के लिए बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हैं और देर से मातृत्व स्वीकार करती हैं, तब इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन राहत की बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों में इस बीमारी से होने वाली मौतों में काफी कमी आई है।
ब्रेस्ट कैंसर का कारण और लक्षण
ब्रेस्ट कैंसर तब होता है जब स्तन की कोशिकाएं अनियमित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह अक्सर एक गांठ के रूप में प्रकट होता है, जिसे महिलाएं सेल्फ एग्जामिनेशन के दौरान महसूस कर सकती हैं। इसकी पहचान के लिए मैमोग्राफी का सहारा लिया जाता है। यदि इस पर ध्यान न दिया जाए, तो कैंसर आसपास के लिम्फ नोड्स और अन्य अंगों में फैल सकता है। इसके इलाज में सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और हार्मोन थेरेपी शामिल हैं।
मौतों में कमी की मुख्य वजहें
हाल ही में अमेरिकन कैंसर सोसायटी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 1989 से 2022 के बीच स्तन कैंसर से होने वाली मौतों में 44% की कमी आई है। इसका मतलब है कि इस अवधि में 517,900 महिलाओं ने कैंसर के खिलाफ अपनी जंग जीत ली है। इस गिरावट के पीछे मुख्यत: तीन कारण हैं:
अर्ली डायग्नोसिस
समय पर कैंसर की पहचान करने से इलाज आसान हो जाता है। डॉक्टर 40 साल के बाद हर महिला को हर दो साल में मैमोग्राफी कराने की सलाह देते हैं।
बेहतर इलाज
कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में होने पर उसका इलाज कम समय और साइड इफेक्ट्स के साथ किया जा सकता है। नई तकनीकों के कारण उपचार प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो गई है।
जागरूकता
कम उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में वृद्धि हो रही है। इस जागरूकता के लिए अक्टूबर महीने को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है।
कैंसर से बचाव के तरीके
ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए एक्सपर्ट्स ब्रेस्टफीडिंग और सही समय पर बच्चे पैदा करने की सलाह देते हैं। इसके अलावा एक हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर भी कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।
इस तरह जागरूकता और समय पर पहचान के माध्यम से, ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों में कमी आ रही है। महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति यह एक सकारात्मक संकेत है, जिससे उन्हें अपनी सेहत का ध्यान रखने में मदद मिलेगी।
