2023 में साउथ कोरिया में हुए मौतों के आंकड़ों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल देश में दिल की बीमारियों, कैंसर, और निमोनिया जैसी घातक बीमारियों ने सबसे ज्यादा लोगों की जान ली। वहीं कम उम्र के लोगों में आत्महत्या मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बना रहा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सुसाइड की दर बढ़ने के बावजूद, कुल मौतों की संख्या में 5.5% की कमी आई है।
दिल की बीमारियों और कैंसर से हुई सबसे ज्यादा मौतें
रिपोर्ट के अनुसार 2023 में प्रति 100,000 साउथ कोरियाई नागरिकों में 689.2 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई, जो कि 2022 के मुकाबले 38.3% कम है। कुल मौतों में से 24.2% लोगों की मौत कैंसर के कारण हुई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि कैंसर साउथ कोरिया में सबसे घातक बीमारी है। हार्ट डिजीज के कारण 9.4% और निमोनिया के कारण 8.3% मौतें हुईं। ये तीन बीमारियां यानी कैंसर, हार्ट डिजीज और निमोनिया, कुल मौतों में से लगभग 40% का कारण बनीं।
प्रमुख बीमारियों के कारण होने वाली मौतें
कैंसर: कुल मौतों का 24.2%
हार्ट डिजीज: 9.4%
निमोनिया: 8.3%
इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि साउथ कोरिया में जीवन शैली और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां अभी भी प्रमुख चिंता का विषय हैं।
आत्महत्या के बढ़ते मामले
युवाओं में आत्महत्या की बढ़ती दर देश के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार 10 से 39 वर्ष की उम्र के लोगों में आत्महत्या मृत्यु का सबसे बड़ा कारण रहा। साउथ कोरियाई सरकार इस समस्या से निपटने के लिए प्रयासरत है, लेकिन इसके बावजूद युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
2023 में साउथ कोरिया में आत्महत्या के कारण 4% लोगों की मृत्यु हुई। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 40 और 50 साल के आयु वर्ग में भी आत्महत्या दूसरा सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है।
युवाओं में सुसाइड की मुख्य वजहें
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं
पारिवारिक या सामाजिक दबाव
आर्थिक समस्याएं
वैश्विक आत्महत्या दर में साउथ कोरिया शीर्ष पर
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के सदस्य देशों में साउथ कोरिया में आत्महत्या दर सबसे अधिक है। 2020 तक हर 100,000 लोगों में से 24.1 लोगों ने आत्महत्या की, जिससे यह देश आत्महत्या के मामलों में शीर्ष स्थान पर है। साउथ कोरिया के बाद लिथुआनिया में 18.5 आत्महत्याएं प्रति 100,000 लोगों पर दर्ज की गईं, जबकि स्लोवेनिया में यह संख्या 15.7 रही।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि साउथ कोरिया को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ मजबूत कदम उठाने की आवश्यकता है। देश में युवाओं पर पढ़ाई, करियर, और सामाजिक दबाव जैसी समस्याएं आत्महत्या की दर बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। सरकार और समाज को इस मुद्दे पर अधिक जागरूकता फैलाने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है।
साउथ कोरिया में आत्महत्या रोकने के लिए कदम
सरकार ने आत्महत्या की दर को कम करने के लिए कई नीतियां और कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, युवाओं के लिए काउंसलिंग सेवाएं, और आत्महत्या रोकने के लिए सार्वजनिक जागरूकता अभियान शामिल हैं। इसके बावजूद, आत्महत्या की दर में प्रभावी कमी लाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
