हाल ही में केरल में ब्रेन-ईटिंग अमीबा (Brain Eating Amoeba) के दो नए मामलों का खुलासा हुआ है। जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गयी है। इस संक्रमण को जिसे प्राइमरी एमीबिक मीनिंजोएन्सेफालाइटिस (PAM) के नाम से जाना जाता है, जोकि बेहद घातक है और अगर समय पर इलाज न हो तो यह मस्तिष्क में तेजी से फैलकर मरीज की मृत्यु का कारण बन सकता है। इस प्रकार के अमीबा की मौजूदगी और संक्रमण के बढ़ते मामले भारत के लिए एक नई स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं।

क्या है ब्रेन-ईटिंग अमीबा

ब्रेन-ईटिंग अमीबा जिसे वैज्ञानिक रूप से Naegleria fowleri के नाम से जाना जाता है, एक प्रकार का सूक्ष्मजीव है जो गर्म और ठहरे हुए पानी में पनपता है। यह अमीबा विशेष रूप से झीलों, नदियों, गर्म झरनों, और दूषित ताजे पानी के स्रोतों में पाया जाता है। जब व्यक्ति इस पानी में तैरता है या डाइविंग करता है और नाक के जरिए यह पानी उसके शरीर में प्रवेश करता है, तब यह अमीबा नाक के रास्ते मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। वहां यह मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट करने लगता है, जिससे संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ता है।

इस अमीबा की पहचान सबसे पहले 1960 के दशक में हुई थी और तब से यह दुर्लभ लेकिन अत्यधिक घातक संक्रमण के रूप में जाना जाता है। PAM (प्राइमरी एमीबिक मीनिंजोएन्सेफालाइटिस) की मृत्यु दर 97% से भी अधिक है, जो इस संक्रमण को अत्यधिक घातक बनाता है।

केरल में नए मामले क्यों बढ़ रहे हैं

केरल में गर्म और आर्द्र जलवायु इस अमीबा के पनपने के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करती हैं। मानसून के बाद जब जलाशयों में पानी ठहर जाता है, तब इस प्रकार के अमीबा की संख्या बढ़ जाती है। यहां के ताजे जल स्रोतों में संक्रमण की संभावना अधिक होती है, खासकर उन लोगों के लिए जो ताजे पानी के स्रोतों में तैराकी करते हैं या गोता लगाते हैं। केरल में हाल ही में दो नए मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क कर दिया है और वहां की जनता में इस घातक संक्रमण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर किया है।

लक्षण और पहचान

ब्रेन-ईटिंग अमीबा के संक्रमण के लक्षण तेजी से विकसित होते हैं और संक्रमण के 1 से 9 दिनों के भीतर दिखने लगते हैं। प्रारंभिक लक्षण सामान्य सर्दी या फ्लू जैसे होते हैं, जिनमें बुखार, सिरदर्द, मिचली, उल्टी और गर्दन में अकड़न शामिल हैं। लेकिन जब संक्रमण मस्तिष्क में गहराई से फैलता है, तो इसके परिणाम और भी गंभीर हो जाते हैं। मरीज भ्रम, चिड़चिड़ापन, दौरे, और कोमा की स्थिति में पहुंच सकता है, जो अंततः मृत्यु का कारण बनता है। PAM के मामलों में, बीमारी का विकास इतना तेज़ होता है कि मृत्यु के खतरे से बचने के लिए जल्दी से जल्दी पहचान और इलाज जरूरी है।

कैसे फैलता है यह संक्रमण

Naegleria fowleri अमीबा ताजे और गर्म पानी में पाया जाता है, जैसे झीलें, नदियां, और गर्म झरने। जब व्यक्ति इस पानी में तैरता है और पानी नाक में प्रवेश करता है, तो यह अमीबा मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। एक बार मस्तिष्क में पहुंचने के बाद, यह तेजी से मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट करना शुरू कर देता है, जिससे संक्रमण तीव्र हो जाता है। इसका सबसे अधिक खतरा गर्म मौसम के दौरान होता है, जब ताजे पानी के स्रोतों में पानी का तापमान बढ़ जाता है।

बचाव के तरीके

ब्रेन-ईटिंग अमीबा से बचने के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी एहतियातों का पालन करना जरूरी है:

गर्म पानी में तैरने से बचें

विशेष रूप से बारिश के बाद ताजे पानी के स्रोतों में तैराकी से परहेज करें।

नाक में पानी जाने से रोकें

अगर तैराकी कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि नाक में पानी न जाए। नाक क्लिप का उपयोग करें या पानी में सिर न डालें।

साफ पानी का उपयोग करें

स्विमिंग पूल या गर्म झरनों में जाते समय साफ और फ़िल्टर्ड पानी का इस्तेमाल करें।

सतर्कता और जागरूकता जरूरी

हालांकि ब्रेन-ईटिंग अमीबा का संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन यह अत्यधिक घातक है। जागरूकता और सतर्कता से ही इसके मामलों को रोका जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति ताजे पानी के स्रोत में तैरने के बाद असामान्य लक्षण महसूस करता है, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। PAM के मामलों में जल्दी इलाज शुरू करना मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

केरल में हाल ही में सामने आए इन मामलों ने एक बार फिर इस खतरनाक संक्रमण के प्रति लोगों को सतर्क रहने की जरूरत जताई है।

By tnm

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