प्रेगनेंसी के दौरान, महिलाओं को शिशु के विकास और स्वास्थ्य की स्थिति जानने के लिए अल्ट्रासाउंड (स्कैन) करवाना जरूरी होता है। इनमें से एक महत्वपूर्ण स्कैन है लेवल 2 अल्ट्रासाउंड, जिसे एनॉमली स्कैन भी कहा जाता है। यह स्कैन गर्भवती महिला के 16वें से 17वें हफ्ते के बीच करवाया जाता है, जिससे शिशु की शारीरिक और मानसिक स्थिति का पता चलता है। हालांकि, कुछ महिलाएं इसे महंगा समझकर सस्ती जगह से करवाती हैं, जिससे कई बार गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

सस्‍ती जगह से करवाया गया अल्ट्रासाउंड

हाल ही में एक मामला सामने आया है, जिसमें एक पति ने मीडिया को बताया कि उनकी पत्नी ने प्रेग्नेंसी के दौरान कई स्कैन करवाए थे, और हर स्कैन की रिपोर्ट सामान्य आई थी। लेकिन जब उनकी पत्नी ने नौवें महीने में कहीं और से स्कैन करवाया, तो पाया गया कि बच्चे में एब्नॉर्मल (दोष) है। इस पर उन्होंने फिर दूसरी जगह से भी टेस्ट करवाया, और वहां भी यही परिणाम सामने आया। इससे इस शख्स ने उस लैब के खिलाफ शिकायत की, क्योंकि उन्हें समय रहते सही जानकारी नहीं दी गई थी।

डॉक्‍टर की चेतावनी

नोएडा के पीडियाट्रिशियन डॉक्टर मोहित सेठी ने इस मुद्दे पर अपनी सोशल मीडिया पर पोस्ट की और बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान लेवल 2 अल्ट्रासाउंड बहुत महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर ने कहा कि इस स्कैन को कभी भी मिस नहीं करना चाहिए और इसे हमेशा अच्छी जगह से करवाना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्कैन करवाने के लिए शहर के सबसे अच्छे रेडियोलॉजिस्ट से ही टेस्ट कराना चाहिए।

जन्‍मजात बीमारी की पहचान

डॉक्टर ने यह भी बताया कि लेवल 2 अल्ट्रासाउंड के दौरान यदि शिशु में कोई कंजेनाइटल बीमारी (जन्‍मजात बीमारी) का पता चलता है, तो उस समय एबॉर्शन भी किया जा सकता है। लेकिन अगर सही समय पर यह बीमारी नहीं पकड़ी जाती और प्रेग्नेंसी आगे बढ़ती है, तो जन्म के बाद बच्चे को उस समस्या के साथ जीवन बिताना पड़ सकता है।

क्‍यों किया जाता है लेवल 2 स्कैन

Fetal Medicine India के अनुसार, यह स्कैन शिशु के शरीर में संरचनात्मक असामान्यताओं का पता लगाने में मदद करता है। कुछ महिलाओं के शिशु में मानसिक या शारीरिक कमजोरी का खतरा होता है, जिसे इस स्कैन के दौरान पहचाना जा सकता है।

लेवल 2 अल्ट्रासाउंड में कौन-कौन सी समस्याएं पहचानी जा सकती हैं?

इस स्कैन के दौरान कई गंभीर असामान्यताओं का पता चलता है जैसे कि:

स्पाइना बिफिडा

एनिसेफली

हाइड्रोसेफालस

डायाफ्रामिक हर्निया

एक्सोम्फालोस/गैस्ट्रोस्किसिस

सेरेब्रल पाल्सी

ऑटिज्म

डाउन सिंड्रोम

हालांकि, यदि स्कैन सामान्य भी हो, तो यह भी संभव है कि बच्चे को बाद में कोई समस्या हो। कुछ स्थितियां, जैसे हृदय दोष और बाउल ऑब्स्ट्रक्शन, गर्भावस्था के बाद के चरणों में ही सामने आ सकती हैं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।

By tnm

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