आंखें हमारे शरीर का अहम हिस्सा मानी जाती हैं। शरीर के बाकी अंगों की तरह इनकी देखभाल भी अच्छे से करना जरुरी है लेकिन आजकल स्क्रीन टाइम ज्यादा होने के कारण इन पर ही सबसे ज्यादा असर हो रहा है। सारा दिन कंप्यूटर लैपटॉप पर बैठने के कारण आंखों पर भी गहरा असर हो रहा है। इन सबके कारण छोटी-छोटी उम्र के बच्चों यहां तक की युवाओं को ही चश्मा लग रहा है। ऐसे में आज आपको डॉ. पियुष सूद जी के कुछ ऐसे टिप्स बताते हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी आंखों को स्वस्थ रख सकते हैं। आइए जानते हैं।

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किस उम्र में होती हैं नजर से जुड़ी समस्याएं

डॉ. पियुष सूद जी का कहना है कि वैसे तो नजर से जुड़ी समस्याएं बच्चों और न्यूबॉर्न बेबीज को भी हो सकती हैं लेकिन ज्यादातर आंखों से जुड़ी समस्याएं 40 की उम्र के बाद या जिन्हें कोई हेल्थ प्रॉब्लम जैसे(डायबिटीज,हाइपरटेंशन या थायरॉइड है उन लोगों में यह समस्या ज्यादा होती है। फोन ज्यादा इस्तेमाल करते हैं इसके अलावा स्क्रीन टाइम होने के कारण भी उनकी आंखों पर प्रभाव पड़ता है। वहीं पेरेंट्स भी बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दे देते हैं जो कि गलत बात है क्योंकि इन सबका असर बच्चे पर होता है। कई बार तो पेरेंट्स समझ ही नहीं पाते कि उनके बच्चों की आंखों पर असर हुआ है। उन्हें यह बात उस समय समझ आती है जब बच्चे को स्कूल में ब्लैकबॉर्ड देखने में परेशानी आती है हालांकि उस समय तक काफी नुकसान हो जाता है ।

आंखों की ड्राइनेस कैसे दूर करें

कोविड के बाद यह समस्या काफी बढ़ गई है क्योंकि कोविड के बाद लोग मोबाइल ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं और बाकी चीजों पर इतना ध्यान नहीं दे रहे। ऐसे में डॉक्टर पियुष का कहना है कि आंखों में पानी के छींटे नहीं मारने चाहिए क्योंकि नल के पानी में क्लोरीन(Chlorine) मौजूद होता है जो आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा लुब्रिकेंट्स इस्तेमाल करने चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कहा कि यदि आप कोई भी किताब या कुछ पढ़ते हैं तो उसे मोबाइल की जगह कंप्यूटर पर पढ़ें। मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा न करें। बड़ी स्क्रीन ज्यादा इस्तेमाल करें क्योंकि जितनी बड़ी स्क्रीन होगी उतना ही स्ट्रेस और फोकस आपका अच्छा होगा।

कितने फायदेमंद है घरेलू नुस्खे

ऐसे में डॉ. का कहना है कि प्याज का रस डालें इससे आंसु आएंगे और आपकी आंखें भी साफ होंगी। वहीं काजल थोड़ी देर के लिए आपकी आंखों को ठंडक देगा लेकिन ज्यादा देर तक डालने से आंखों को नुकसान भी हो सकता है।

नॉर्मल लोग कितने बार चेक कराएं आंखें

ऐसे लोग जिनकी आंखे बिल्कुल ठीक हैं उन्हें साल में एक बार तो डॉक्टर से आंखे चेक करवानी ही चाहिए। वहीं यदि बच्चों को चश्मा लगा है तो उन्हें 3 महीने के बाद जरुर दिखाएं ताकि इस बात का पता चल सके कि उनकी आंखों का नंबर कितना बढ़ रहा है और उनकी आंखों को बार-बार चेक करवाना भी बेहद जरुरी है।

क्या होता है काला मोतिया?

काला मोतिया ओप्टिक्ल नर्व(Optical nerve) का डैमेज होता है उसमें लॉसेस विजन(Losses Vision) हमेशा के लिए रहता है और यह ज्यादातर मामलों में जैनेटिक्ल ही होता है। हालांकि इसके कई कारण है जैसे ट्रोमा, किसी दवाई के कारण, पोस्ट सर्जरी लेकिन इसमें जब भी मरीज चेक करवाता है तभी इसका पता चलता है और इसका इलाज भी समय रहते ही करवाना चाहिए। वहीं सफेद मोतिया आंख के अंदर जो नैचुरल लैंस होता है वो सफेद हो जाता है और मोती की तरह दिखता है इसके कारण इसे सफेद मोतिया कहा जाता है।

6/6 क्या होता है

यह सेल स्टार्ट(Cell start) के अंदर रीडिंग(Reading) होती है इसमें देखा जाता है कि मरीज की विजन विजुअल एक्विटी(Vision Visual Equity) कितनी है। 6/6 का अर्थ है कि 60 मीटर पर आपको एक शब्द बिल्कुल सही नजर आ रहा है। यदि किसी का 6/6 नहीं है या 6/12, 6/24 या 6/36 है तो उसे चश्मे के जरिए सही किया जाता है। हालांकि इसके अलावा भी कई तरीके है।

चश्मा या कॉन्टैक्ट लैंस क्या सही है

यदि कॉन्टैक्ट लैंस को आपने कुछ समय जैसे 4-5 घंटे के लिए लगाना है तो सही है लेकिन उसे लगाकर सोने से आंखों पर असर हो सकता है। वहीं यदि आपको कॉन्टैक्ट लैंस या चश्मे में से कुछ चुनना है तो बेहतर है कि आप चश्मा ही चुनें। वहीं जो कॉस्मैटिक लैंस भी 3-4 घंटे के लिए सही है ज्यादा समय तक इस्तेमाल आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है।

आई डोनेशन क्या है

आंखों में से सिर्फ एक हिस्सा ही निकाल कर डोनेट किया जाता है और वह है कोरनिया यानी की आंख के अंदर वाला काला हिस्सा। हालांकि उसके अंदर भी कई सारे अलग-अलग कोम्पोनेंट्स मौजूद होते हैं लेकिन डॉ. पियुष के अनुसार, एक कोरनियां अलग-अलग विजन में काम आ सकता है। ऐसे में यदि एक व्यक्ति अपनी आंखे दान करता है तो वह चार और लोगों की जिंदगियां बचा सकता है।

महिलाओं और पुरुषों में आंखों की समस्याएं

डॉ. का कहना है कि महिलाओं और पुरुषों में आंखों की समस्याएं अलग-अलग होती है। जैसे कि महिलाओं में ईआरएमए(ERMA)जो कि रेटिना की प्रॉब्लम है वो ज्यादा होती है क्योंकि हॉर्मोन्स दोनों में अलग-अलग होते हैं।

आंखों को ऐसे रखें स्वस्थ

. स्क्रीन टाइम कम करें। यदि जॉब पर हैं तो आई लुब्रिकेंट्स रखें।

. डॉक्टर्स की सलाह से आप लुब्रिकेंट्स डालकर आंखों को स्वस्थ रख सकते हैं।

. इसके अलावा कुछ देर के लिए आंखें बंद रखकर भी आप इन्हें आराम दे सकते हैं।

By tnm

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