कर्नाटक में जहां डेंगू के मामलों में गिरावट दर्ज की जा रही है, वहीं एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) का प्रकोप राज्य के लिए चिंता का विषय बन गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 31 जुलाई तक एच1एन1 के 855 मामलों की पुष्टि हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। गत वर्ष इस अवधि तक केवल 181 मामले दर्ज किए गए थे। इस वर्ष का आंकड़ा सात गुना ज्यादा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
एच1एन1 का बढ़ता प्रकोप: स्कूली बच्चे और यात्रा इतिहास वाले लोग अधिक प्रभावित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एच1एन1 के मामलों में वृद्धि के कारणों में मौसम में बदलाव, बढ़ता सामाजिक मेलजोल, और फ्लू वायरस का म्यूटेशन शामिल हो सकता है। इस वर्ष के मामले स्कूली बच्चों और उन लोगों में अधिक देखे जा रहे हैं जिनका हाल ही में यात्रा का इतिहास है। इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती उपायों को बढ़ावा देने के साथ-साथ जन जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
दो मरीजों की मौत, तीन की अन्य कारणों से मृत्यु
कर्नाटक में एच1एन1 से अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें एक 15 वर्षीय लड़का जो मैसूरु में रहता था और एक 48 वर्षीय महिला जो डोड्डबल्लापुर की निवासी थी, शामिल हैं। इसके अलावा तीन अन्य मरीजों की मृत्यु हुई है, लेकिन उनकी मौतें अन्य बीमारियों और अधिक उम्र के कारण हुई हैं।
स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय निगरानी और जन जागरूकता अभियान
कर्नाटक के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के परियोजना निदेशक डॉ. अंसार अहमद के अनुसार स्वास्थ्य विभाग एच1एन1 के लिए सक्रिय निगरानी नहीं करता है, लेकिन जन जागरूकता बढ़ाने और प्रयोगशाला परीक्षणों की संख्या में वृद्धि ने मौसमी परिवर्तनों के कारण होने वाले मामलों की रिपोर्टिंग को बेहतर बनाया है। उन्होंने कहा कि विभाग मामलों की बारीकी से निगरानी कर रहा है और किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
चिकित्सकों की चिंता: इस बार लक्षण ज्यादा गंभीर
शहर के चिकित्सकों के अनुसार पिछले दो से तीन हफ्तों के दौरान एच1एन1 के मामलों में तेजी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार एच1एन1 के लक्षण ज्यादा गंभीर हैं। शहर के एक निजी अस्पताल में छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. मजीद पाशा के अनुसार करीब 65 प्रतिशत मरीज फ्लू के लक्षणों के साथ ओपीडी में आ रहे हैं। बीते माह एच1एन1 के 70 मरीजों में से लगभग 25 को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ी। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है, क्योंकि मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है और लक्षण पहले की तुलना में ज्यादा तीव्र हो रहे हैं।
आरटी-पीसीआर परीक्षण और उच्च जोखिम वाले समूह
आरटी-पीसीआर परीक्षण के जरिए एच1एन1 का निदान किया जाता है। इस वायरस के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, थकान, और सिरदर्द शामिल हैं। कुछ मामलों में गंभीर सांस की तकलीफ, मतली, उल्टी, दस्त, और निमोनिया जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोग इस वायरस के गंभीर लक्षणों के साथ आते हैं, लेकिन सभी उम्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं।
मामलों में उछाल के संभावित कारण
एक्सपर्ट्स के मुताबिक एच1एन1 के मामलों में उछाल के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसमें मौसमी परिवर्तन, सामाजिक मेलजोल में वृद्धि, और फ्लू वायरस के विकसित होने के कारण आबादी में कम प्रतिरक्षा शामिल है। इसके अलावा कुछ समूहों में कम टीकाकरण दर भी इस उछाल के लिए जिम्मेदार हो सकती है।
फ्लू टीकाकरण की सलाह
संचारी बीमारियों के लिए कर्नाटक राज्य तकनीकी सलाहकार समिति के प्रमुख डॉ. रवि के. ने उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों को फ्लू के मौसम की शुरुआत से पहले इन्फ्लूएंजा का टीका लगवाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बच्चों, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, और हृदय रोग, डायबिटीज, पुरानी फेफड़ों और गुर्दे की बीमारियों से पीड़ित लोगों को हर साल फ्लू का टीका लगवाना चाहिए, जिससे वे इस बीमारी से सुरक्षित रह सकें।
वर्षवार आंकड़े और मृत्युदर
स्वाइन फ्लू के मामलों और उससे हुई मौतों के आंकड़े चिंता का विषय बने हुए हैं। वर्ष 2018 में 1,733 मामले और 87 मौतें हुईं थीं, जबकि 2019 में 2,030 मामले और 96 मौतें दर्ज की गईं। 2020 में मामले घटकर 458 हो गए थे, जिनमें से 3 की मौत हुई। 2021 में केवल 13 मामले दर्ज किए गए और कोई मौत नहीं हुई। 2022 में 517 मामले सामने आए और 14 मौतें हुईं। हालांकि, 2023 में अब तक 181 मामले दर्ज हुए हैं, और किसी की मृत्यु नहीं हुई है।
