मंदिर की घंटियों की आवाज जहां एक ओर लोगों की सेहत के लिए लाभकारी मानी जाती है, वहीं अब दूसरी ओर इसे ध्वनि प्रदूषण का कारण भी माना जा रहा है। दरअसल हाल ही में दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में स्थित गौर सौंदर्यम सोसायटी के मंदिर में बजने वाली घंटी पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने नोटिस जारी कर दिया है। बता दें कि इस नोटिस की वजह ध्वनि प्रदूषण बताई जा रही है, जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस नोटिस पर जमकर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है।

मंदिर की घंटी से ध्वनि प्रदूषण की शिकायत

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब सोसायटी में रहने वाले एक निवासी ने मंदिर में आरती के दौरान बजने वाली घंटी को लेकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता मुदित बंसल ने 30 जुलाई को ई-मेल के जरिए UPPCB को बताया कि मंदिर में बजने वाली घंटियों से तेज शोर होता है, जिससे ध्वनि प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो रही है।

बोर्ड की जांच में 70 डेसिबल का शोर दर्ज

शिकायत मिलने के बाद 5 अगस्त को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मंदिर का निरीक्षण किया। जांच के दौरान बोर्ड को पता चला कि मंदिर की घंटी से 70 डेसिबल का शोर उत्पन्न हो रहा है, जो निर्धारित सीमा से अधिक है। इस पर बोर्ड ने सोसायटी को ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 के तहत नोटिस भेजा और जवाब मांगा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ नोटिस

https://twitter.com/siddharth2596/status/1826234986288353662

बोर्ड द्वारा जारी किए गए इस नोटिस की कॉपी जैसे ही सोशल मीडिया पर आई, लोगों ने इस पर प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। कई यूजर्स ने इस नोटिस को योगी सरकार के कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि योगीराज में ये हो रहा है तो फिर क्या किया जाए? वहीं, कुछ लोगों ने शिकायतकर्ता की ओर से उठाए गए इस मुद्दे को जायज ठहराया।

कानूनी प्रावधानों का पालन करने की हिदायत

UPPCB ने सोसायटी को नोटिस में कहा है कि ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 का पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि घंटी के शोर से अन्य निवासियों को कोई असुविधा न हो। बोर्ड ने सोसायटी से इस संबंध में जवाब भी मांगा है।

धार्मिक आस्था और कानूनी प्रावधानों के बीच बढ़ता टकराव

यह मामला धार्मिक आस्था और कानूनी प्रावधानों के बीच टकराव का प्रतीक बन गया है। मंदिर की घंटी बजाने जैसे धार्मिक अनुष्ठानों को नियंत्रित करने का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है, और ऐसे में UPPCB का यह नोटिस न केवल कानूनी पहलू बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से भी चर्चा का विषय बन गया है।

वहीं सोशल मीडिया पर लोग इस नोटिस के पक्ष और विपक्ष में तर्क देते हुए अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। अब देखना यह है कि सोसायटी इस नोटिस का क्या जवाब देती है और इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

By tnm

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