आधुनिकता ने लोगों की जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। वहीँ युवाओं की पहली प्राथमिकता शानदार कैरियर को आगे बढ़ाने की होती है। चाहे लड़का हो या लड़की, हर कोई पहले कैरियर बनाने को एहमियत दे रहा है। ऐसे में शादी और बच्चा पीछे छूट जाता है। लेकिन आधुनिक समाज में विज्ञान भी काफी आगे बढ़ गया है ।
विज्ञान ने अब यह सुविधा दे दी है जिसमें कोई महिला अगर चाहे तो वह गर्भधारण की उम्र में अपने अंडे को सहेज कर रखवा सकती है और कुछ सालों बाद इसी अंडे से गर्भधारण कर सकती हैं। जी हाँ विदेशों में तो महिलाओं का एग्स फ्रीज कराने का चलन पुराना है, लेकिन धीरे-धीरे अब भारत में मेट्रोपॉलिटन सिटीज के बाद उत्तर भारत में चंडीगढ़ में भी यह चलन देखने को मिल रहा है।
एग फ्रीजिंग का ट्रेंड बढ़ा है
शिक्षा और बेहतर करियर के लिए लड़कियां शादी के बारे में देर से प्लान करती हैं। ऐसे में जब शादी देर से होती हैं तो वे मां भी देर से बनती हैं। इसी बात को ध्यान रखते हुए युवतियां अपने अंडे सुरक्षित (एग फ्रीजिंग) करवा रही हैं। बड़े शहरों में एग फ्रीजिंग का ट्रेंड बढ़ रहा है। चंडीगढ़ में भी मांग बढ़ने के साथ एग फ्रीजिंग के लिए कई नए सेंटर खुल चुकें हैं।
सामान्य महिलाएं भी इसका सहारा ले रही हैं
एक्सपर्ट्स के मुताबिक पहले जहां गंभीर बीमारी वाले केस में इस तकनीक को उपयोग में लाते थे। वहीं अब सामान्य जीवन जी रहीं युवतियां भी इसका सहारा ले रहीं हैं। करियर बनाने के चक्कर में देर से शादी या फिर देर से मां बनने के निर्णय के चलते ऐसा हो रहा है।
बता दें इस तकनीक से युवतियों की मुश्किल आसान तो हो रही है, लेकिन इसके साथ साथ वे तनाव का भी शिकार हो रही हैं कि उम्र ढलने के बाद वह मां नहीं बन पाएंगी।
50 साल की उम्र में भी मां बनना हुआ आसान
इंडियन सोसाइटी ऑफ असिस्टेड रिप्रोडक्शन (आईएसएआर) की चंडीगढ़ शाखा की अध्यक्ष डॉ. निर्मल भसीन का कहना है कि अब इस तकनीक का लाभ लेने वाली युवतियों और महिलाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। शादी से पहले एग फ्रीज कराने वाली युवतियों की संख्या शादीशुदा महिलाओं की तुलना में अधिक है क्योंकि इस तकनीक का उपयोग कर युवतियां 50 साल की उम्र में भी आसानी से मां बन सकती हैं।
कानून में भी इसकी छूट दी गयी है। वहीँ डॉ. भसीन ने कहा हैं कि 34 साल की उम्र के बाद तनाव का स्तर बढ़ जाता है। इसका असर महिलाओं के अंडों पर भी पड़ता है। जिस वजह से अंडों की संख्या कम होने लगती है। इस कारण मां बनने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
लेकिन इस तकनीक ने इन युवतियों की राह को आसान बना दिया है। सामान्य तौर पर 39 साल से पहले युवतियों और महिलाओं को अपने अंडे सुरक्षित करा लेने चाहिए क्योंकि फ्रीज किए गए अंडों का उपयोग अगले 15 साल के बीच किया जा सकता है।
क्या होता है एग फ्रीजिंग
एग फ्रीजिंग महिलाओं को गर्भधारण की सही उम्र बित जाने के बाद भी प्रेग्नेंसी की सुविधा देती है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर महिला की पूरी जांच पड़ताल करते हैं। एक महिला में प्रत्येक महीने एक अंडे का निर्माण होता है।
लेकिन प्रत्येक महीने का अंडा फ्रीजिंग के लिए सही नहीं होता, इसलिए जांच के बाद यह पता चलता है कि किस महीने के अंडे को सुरक्षित रखा जाए। अगर अंडा संरक्षित करने की दर कम होगी तो बाद में उस अंडे से प्रेग्नेंसी की संभावना भी कम होगी। इसलिए अंडा निकालने से पहले महिलाओं का इलाज भी किया जा सकता है।
जब अंडा पूरी तरह से स्वस्थ्य और गर्भधारण के योग्य होता है तब डॉक्टर बहुत ही बारीकी से अंडे को निकालता है। यह प्रक्रिया बहुत ही सूक्ष्म होती है जिसके कारण छोटी सी सर्जरी भी की जा सकती है। इसके तहत बहुत ही पतली नीडिल से अंडे को निकाला जाता है और इसे सबजीरो टेंपरेचर पर फ्रीज कर दिया जाता है।
