यूं तो बच्चे के जन्म होने पर घर में खुशी का माहौल बना होता है, लेकिन जब बच्चे में किसी जन्मजात बीमारी का पता चलता है तो परिवार में टेंशन–का माहौल बन जाता है। क्योंकि कुछ जन्मजात बीमारी ऐसी होती हैं जिनका इलाज काफी महंगा होता है। जी हां हाल ही में सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म x पर पोस्ट शेयर कर 16 महीने के वेहांत जैन के इलाज के लिए क्राउडफंडिंग पहल में योगदान देने की अपील की है। दरअसल वेहांत जैन स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित है। वहीं इस बीमारी को ठीक करने के लिए जो इन्जेक्शन लगने वाला है, वो 17 करोड़ रुपये का है। वहीं डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि अगर इस बच्चे को 2 साल के होने तक इन्जेक्शन नहीं लगता है तो बच्चे का जीवन गंभीर रूप से मुश्किल में पड़ सकता है। बता दें कि बच्चे का पिता एक इंजीनियर है और माता एक सीए है। लेकिन उन्होंने बच्चे की देख रेख करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी है।
पोस्ट शेयर कर बच्चे के इलाज के लिए मदद की अपील
संजय सिंह ने अपने x पर पोस्ट शेयर कर लोगों से वेहांत जैन के इलाज में योगदान देने की अपील की है। वहीं संजय सिंह पोस्ट के में लिखते हैं कि वेहांत जैन SMA यानी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप 2 की बीमारी से पीड़ित है। अगर इस बच्चे को 2 साल की उम्र तक इंजेक्शन नहीं लगा तो बच्चे का जीवन संकट में आ सकता है। हम सब की मानवीय ज़िम्मेदारी बनती है कि बच्चे की मदद की जाए। इस बीमारी में 17 करोड़ रुपए का इंजेक्शन लगता है। ऐसे में देश और दिल्ली के लोगों से घर पर रह रहे बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए अपने क्षमता के मुताबिक उतना योगदान दें। ताकि बच्चा ठीक होकर नॉर्मल बच्चे के समान जीवन जी सके।
क्या होता है SMA
SMA यानी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप 2 एक जन्मजात दुर्लभ बीमारी है। जो मस्तिष्क के तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। वहीं यह बीमारी कई प्रकार होते हैं। लेकिन इसमें से टाइप-2 सबसे गंभीर होता है। इस बीमारी में बच्चा अपने सिर को सहारा देने या बिना मदद के बैठने में सक्षम नहीं होता है। उसके हाथ और पैर ढीले हो सकते हैं और कुछ भी निगलने में समस्या हो सकती है। सांस को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों में कमजोरी के कारण, टाइप 2 एसएमए वाले अधिकांश बच्चे दो साल से अधिक जीवित नहीं रह पाते हैं।
इलाज कैसे होता है
इस बीमारी के लिए खास इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। इस खास इंजेक्शन को अमेरिका से मंगाया जाता है। जो काफी महंगा होता है। साथ ही एक्सपर्ट्स ने इस दुर्लभ तंत्रिका स्थिति के लिए एक निश्चित उपचार नहीं बताया है जो इन मांसपेशियों की बर्बादी और कमजोरी की वजह बनती है। वहीं यह इन्जेक्शन इस बीमारी को पूरी तरह से खत्म तो नहीं कर सकता है। लेकिन यह बीमारी को आगे विकसित होने से रोक देता है। इस इंजेक्शन का नाम जोलजेस्मा (Zolgensma) है।
