बीते कुछ समय से ऐसे कई मामले हमारे सामने आए हैं, जहां डॉक्टर के द्वारा पेशेंट को ब्रेन डेथ घोषित करने के बाद उसके परिवारजनों ने अंगदान किया है और कई लोगों को नई जिंदगी दी है। ऐसे में द हिन्दू के मुताबिक डॉक्टरों को मस्तिष्क मृत्यु प्रमाणन के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक वर्कशॉप लगाया गया। वहीं इस वर्कशॉप में मेडिकल फ्रटर्निटी को राज्य में Tertiary Care Centers में डेली होने वाली ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और जागरूकता देकर और ब्रेन डेथ की ऑर्गन ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में उनके डोमेन ज्ञान को बढ़ाकर अधिक आत्मविश्वास दिलाना है।
वर्कशॉप का आयोजन
बता दें कि इस वर्कशॉप का आयोजन के-सोट्टो यानी केरल राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन द्वारा सरकारी डॉक्टरों के एक नए आधिकारिक पैनल को दिए जा रहे प्रदर्शन और प्रशिक्षण के हिस्से के रूप में किया गया था। जो राज्य के विभिन्न अस्पतालों में ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन करने के लिए जिम्मेदार होंगे। वहीं वर्कशॉप की शुरुआत डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन थॉमस मैथ्यू ने की। वर्कशॉप की उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता के-सोट्टो के एग्ज़ेक्यटिव डायरेक्टर नोबल ग्रेसियस ने किया।
क्या बताया गया वर्कशॉप में
वर्कशॉप में बताया गया कि उन्हें मस्तिष्क मृत्यु के प्रमाणीकरण में शामिल डाइगनोस्टिक प्रक्रियाओं और उन प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित किया जाएगा। इतना ही नहीं इन प्रक्रियाओं को सख्ती और व्यवस्थित रूप से पालन किया जाएगा। साथ ही इस वर्कशॉप में मस्तिष्क मृत्यु प्रमाणीकरण के नैतिक और नैतिक पहलू, मस्तिष्क मृत्यु का निर्धारण और घोषणा करने के लिए नैदानिक पैरामीटर, मस्तिष्क मृत्यु की आधिकारिक घोषणा और प्रमाणीकरण के लिए अपनाई जाने वाली व्यावहारिक प्रक्रियाएं, परिवारों को मस्तिष्क मृत्यु के बारे में बताना आदि शामिल है।
