आजकल की खराब खानपान और लाइफस्टाइल की वजह से बहुत से लोग कैंसर की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। वहीं बहुत से लोग इलाज के जरिए इस बीमारी को मात भी दें रहे हैं। ऐसे में क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी और अन्य शोध संस्थान कैंसर के इलाज में एक नए युग की शुरुआत कर रहे हैं, जो संभावित रूप से लाखों लोगों की जान बचा सकता है और कैंसर से लड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी अब कैंसर वैक्सीन mRNA के ट्रायल के लिए पूरी तरह तैयार है। ऑस्ट्रेलिया में जल्द ही कैंसर वैक्सीन mRNA का ट्रायल शुरू होने जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चरों ने कैंसर के मरीजों पर इस वैक्सीन का ट्रायल करने का फैसला किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ बायो इंजिनियरिंग एंड नैनोटेक्नोलॉजी (AIBN) की लैब में mRNA कैंसर टीकों के डिजाइन पर गहन चर्चा की गई है।

मेडिकल रिसर्च फ्यूचर फंड (एमआरएफएफ) का सहयोग

मेडिकल रिसर्च फ्यूचर फंड (एमआरएफएफ) के नेशनल क्रिटिकल रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोग्राम से $3.3 मिलियन खर्च करके इस पूरे प्रोग्राम को अंजाम दिया जाएगा। नया केंद्र स्थानीय अनुसंधान समुदाय को ऐसे टीके उपलब्ध कराएगा जो प्रत्येक मरीज के लिए जरूरी होगा। AIBN की BASE सुविधा के उप निदेशक डॉ. सेठ चीथम ने कहा कि यह कैंसर के इलाज में एक शानदार और सराहनीय कदम है। mRNA कैंसर टीकों का इस्तेमाल अब शरीर की इम्युनिटी प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन्हें खत्म करने के लिए प्रशिक्षित करने के लिए किया जा रहा है।

एनएचएस की पहल

एनएचएस ने बायोएनटेक और जेनेंटेक द्वारा विकसित किए जा रहे व्यक्तिगत कैंसर टीकों को मरीजों को देने के लिए एक ट्रायल शुरू किया है। पहले मरीज को यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स बर्मिंघम एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट में आंत के कैंसर के लिए एक विशेष टीका लगाया गया था। यह परीक्षण एनएचएस इंग्लैंड की कैंसर वैक्सीन लॉन्च पैड पहल का हिस्सा है। बायोएनटेक कोलोरेक्टल कैंसर वैक्सीन परीक्षण को स्पॉन्सर कर रहा है। कंपनी प्रारंभिक डेटा प्रस्तुत करेगी, जिसमें कोलोरेक्टल कैंसर का जल्दी पता लगाने में सर्कुलेटिंग ट्यूमर डीएनए की क्षमता पर प्रकाश डाला जाएगा।

mRNA तकनीक का उपयोग

बता दें कि जिस वैक्सीन का ट्रायल किया जाएगा, उसमें mRNA तकनीक का उपयोग किया गया है। वहीं यह वैक्सीन फाइजर-बायोएनटेक कोविड-19 वैक्सीन की तरह ही है, जिसे व्यक्ति के कैंसर म्यूटेशन के अनुरूप बनाया गया है। कैंसर वैक्सीन लॉन्च पैड से हज़ारों मरीज़ों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जो नज़दीकी और इसमें शामिल अस्पतालों में क्लिनिकल ट्रायल तक तेज़ पहुंच की सुविधा प्रदान करता है। इंग्लैंड के 30 अस्पताल इस पहल में शामिल हो चुके हैं और अन्य अस्पताल भी इसमें शामिल होने वाले हैं।

विभिन्न प्रकार के कैंसर पर परीक्षण

यह पहल पैंक्रियाटिक और फेफड़ों के कैंसर सहित विभिन्न प्रकार के कैंसर के लिए परीक्षण की पेशकश का दावा करती है। डॉ. सेठ चीथम ने कहा कि mRNA कैंसर टीकों का विकास और परीक्षण कैंसर के इलाज में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। यह न केवल कैंसर रोगियों के लिए बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

By tnm

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