इन दिनों भीषण गर्मी से केवल इंसान ही परेशान नहीं है बल्कि वन्यजीवों पर भी इसका काफी प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में यूपी के बुलंदशहर से भी एक चौकानें वाला मामला सामने आया है। जहां भीषण गर्मी की वजह से एक बंदर बेहोश हो गया जिसकी वीडियो काफी ज्यादा वायरल हो रही है। दरअसल इस वीडियो में एक पुलिस कर्मी ने बेहोश हुए बंदर को होश में लाने के लिए सीपीआर की मदद से कोशिश कर रहा है।
पुलिस कर्मी विकास तोमर ने बचाई बंदर की जान
बता दें कि बुलंदशहर जिले के छतारी में बहुत सारे बंदर पाए जाते हैं। इस चिलचिलाती धूप में थाना छतारी के बाहर एक बंदर गर्मी की वजह से बेहोश होकर पेड़ से गिर गया। जिसके बाद बहुत से लोग उससे दूर भाग रहे थे लेकिन इस बीच बंदर की मदद करने के लिए थाना छतारी का पुलिस कर्मी विकास तोमर आगे आया। विकास तोमर ने बंदर को गोद में उठाया और उसे पहले पानी पिलाया जब बंदर को होश नहीं आया तो उसे हार्ट पंपिंग की। वहीं बहुत देर तक बंदर को सीपीआर देने के बाद होश आया। हालांकि वीडियो देख लोग विकास तोमर की काफी प्रशंसा कर रहे हैं । ऐसे में आइए जानते है CPR क्या है और इससे किसी की जान कैसे बढ़ सकती है।
क्या है सीपीआर

सीपीआर का पूरा नाम कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन है। यह भी एक प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा यानी फर्स्ट एड है। जब किसी व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत हो या फिर वो सांस न ले पा रहा हो और बेहोश हो जाए तो इस कंडीशन में सीपीआर से उसकी जान बचाई जा सकती है। वहीं बिजली का झटका लगने पर, पानी में डूबने पर और दम घुटने पर सीपीआर दी जाती है। अगर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है तो उस टाइम पर सीपीआर देने से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।
कैसे दिया जाता है CPR
सीपीआर देने के लिए सबसे पहले पीड़ित को किसी ठोस जगह पर लिटा दें। अब उसकी नाक और गला चेक कर ये सुनिश्चित करें कि उसे सांस लेने में कोई रुकावट तो नहीं है। जीभ अगर पलट गयी है तो उसे सही जगह पर उंगलियों के सहारे लाएं। वहीं सीपीआर दो तरीके से दिए जाते हैं एक छाती को दबाना और दूसरा मुँह से सांस देना जिसे माउथ टु माउथ रेस्पिरेशन कहते हैं।
छाती को दबाना
पहली प्रक्रिया में पीड़ित के सीने के बीचोबीच हथेली रखकर पंपिंग करते हुए दबाया जाता है। एक से दो बार ऐसा करने से धड़कनें फिर से शुरू जाती है। पंपिंग करते समय दूसरे हाथ को पहले हाथ के ऊपर रख कर उंगलियो से बांध लें अपने हाथ और कोहनी को सीधा रखें।
मुँह से सांस देना
अगर पम्पिंग करने से भी धड़कने शुरू नहीं होती तो पम्पिंग के साथ मरीज को कृत्रिम यानि आर्टिफिशियल सांस देने की कोशिश की जाती है। ऐसा करने के लिए हथेली से छाती को 1 -2 इंच दबाएं, ऐसा प्रति मिनट में 100 बार करें। सीपीआर में दबाव और आर्टिफिशियल सांस का एक खास अनुपात होता है। वहीं 30 बार छाती पर दबाव बनाया जाता है तो दो बार आर्टिफिशियल सांस दी जाती है। ध्यान रहे जब भी आप किसी को आर्टिफिशियल सांस देते है तो उस समय मरीज की नाक को दो उंगलियों से दबाकर मुंह से सांस दें। ऐसा इसलिए क्योंकि नाक बंद होने पर ही मुंह से दी गयी सांस फेफड़ों तक पहुंच पाती है।
