केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में मम्प्स (गलसुआ) बीमारी के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार एक ही दिन में 50 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं। यह बीमारी खासतौर पर स्कूलों में बच्चों के बीच फैल रही है, जिसके कारण जिला चिकित्सा अधिकारियों ने सतर्कता बरतने की अपील की है।
मम्प्स क्या है?
मम्प्स या गलसुआ एक वायरल संक्रमण है जो गालों के पास स्थित सलाइवा (लार) बनाने वाली पैरोटिड ग्रंथियों को प्रभावित करता है। इस संक्रमण का कारण मम्प्स वायरस है, जो संक्रमित व्यक्ति के मुंह या नाक से निकलने वाली बूंदों से फैलता है। यह खासकर बच्चों में अधिक देखा जाता है, लेकिन किसी भी उम्र का व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है।
मम्प्स के लक्षण
गालों और गर्दन के पास सूजन और दर्द
चबाने में कठिनाई
बुखार
सिरदर्द
मांसपेशियों में दर्द और थकान
भूख कम लगना
वयस्कों में यह बीमारी ज्यादा गंभीर हो सकती है, जिससे अंडकोष में सूजन, दर्द और कोमलता जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।
मम्प्स कैसे फैलता है
मम्प्स का संक्रमण मुख्य रूप से हवा के माध्यम से फैलता है। जब संक्रमित व्यक्ति छींकता है या खांसता है, तो वायरस हवा में मिलकर दूसरों को संक्रमित कर सकता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन, पानी की बोतल या खाने का सामान शेयर करने से भी यह वायरस फैल सकता है।
मम्प्स से बचाव के उपाय
संक्रमित व्यक्ति का इस्तेमाल किया हुआ खाना या पानी न लें
खांसते या छींकते वक्त मुंह और नाक को ढककर रखें
संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें और उनका संपर्क कम से कम करें
सबसे प्रभावी तरीका है एमएमआर (मम्प्स, मीजल्स, और रूबेला) वैक्सीनेशन, जो 12 से 15 महीने की उम्र में बच्चों को दी जाती है। यह वैक्सीन मम्प्स से बचाव में बेहद प्रभावी है और इसके द्वारा संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
केरल में स्थिति
केरल के तिरुवनंतपुरम और मल्लपुरम जिलों में मम्प्स के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। तिरुवनंतपुरम जनरल अस्पताल में दो डॉक्टर भी इस वायरस से संक्रमित हो गए हैं और उन्हें इलाज के लिए 10 दिन की छुट्टी पर भेजा गया है। अधिकारियों ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
मम्प्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण और स्वच्छता को प्राथमिकता देना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सबसे प्रभावी उपाय हैं।
