आजकल आए दिन स्कूल में खराब खाना खाने से बच्चों के बीमार होने के कई मामले सामने आते है।एक ऐसा ही मामला महाराष्ट्र के ठाणे शहर से सामने आया है, जहां एक निजी स्कूल में मिड डे मील खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ गई है। मंगलवार को ठाणे के कलवा सह्याद्री स्कूल में मिड डे मील खाने के बाद 38 बच्चों को पेट दर्द, मतली, सिरदर्द और चक्कर आने की शिकायत हुई। इन बच्चों की उम्र 8 से 11 साल के बीच बताई जा रही है।
अस्पताल में भर्ती बच्चों की हालत स्थिर
बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें तुरंत कलवा शहर के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि इन बच्चों को मिड डे मील खाने के बाद अचानक स्वास्थ्य समस्याएं होने लगीं। उनकी शिकायतों में पेट दर्द, मतली, सिरदर्द और चक्कर आना शामिल था, जिसके बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालांकि अस्पताल में भर्ती किए गए सभी बच्चों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें खतरे से बाहर कर दिया गया है।
प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया
ठाणे नगर निगम (टीएमसी) के अतिरिक्त आयुक्त संदीप मालवी ने पीटीआई को जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना दोपहर के भोजन के बाद हुई। बच्चों की हालत बिगड़ने की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रशासन और निगम के अधिकारी तत्काल हरकत में आ गए और बच्चों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार बच्चों का इलाज किया जा रहा है और उन पर इलाज का असर भी हो रहा है। डॉक्टरों ने आश्वासन दिया है कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं और जल्द ही पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे।
मिड डे मील की जांच शुरू
इस घटना के बाद प्रशासन ने स्कूल के मिड डे मील की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि भोजन में कोई समस्या थी या फिर किसी अन्य कारण से बच्चों की तबीयत बिगड़ी। ठाणे नगर निगम (टीएमसी) के स्वास्थ्य विभाग ने खाने के सैंपल को परीक्षण के लिए भेज दिया है। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मिड डे मील के प्रबंधन में सुधार के उपाय किए जाएंगे और इसके साथ ही स्कूलों में स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों को और सख्त किया जाएगा।
बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर से उठाया है। मिड डे मील बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई एक सरकारी योजना है, लेकिन इस तरह की घटनाएं बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े करती हैं। सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना के तहत भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके।
