एक हेल्दी शरीर के लिए एक अच्छी नींद लेना बेहद जरुरी है। वहीं नींद पूरी न होने की वजह से कई हेल्थ प्रॉब्लम होने लगते हैं। इन्हीं समस्याओं में से एक स्लीप एपनिया की समस्या भी है। दरअसल हाल ही में एक स्टडी से पता चला है कि अनियंत्रित स्लीप एपनिया से ब्रेन को नुकसान पहुंच सकता है। अनियंत्रित स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति जिसमें व्यक्ति रात में कई बार 10 सेकंड या उससे अधिक समय के लिए सांस लेना बंद कर देता है। लेकिन स्टडी के मुताबिक ये भविष्य में मस्तिष्क के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। स्लीप एपनिया के गंभीर मामलों में यह पाया गया कि यह मस्तिष्क की श्वेत पदार्थ (व्हाइट मैटर) को नुकसान पहुंचा सकता है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र के बाकी हिस्सों के बीच संचार को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होती है।
स्लीप एपनिया की वैश्विक समस्या

विश्व भर में अनुमानित 936 मिलियन वयस्क, जिनकी आयु 30 से 69 वर्ष के बीच है, स्लीप एपनिया से पीड़ित हो सकते हैं, जबकि कई लोग इसका निदान नहीं करवा पाते। यदि स्लीप एपनिया गंभीर हो और इसका इलाज न हो, तो इससे किसी भी कारण से मरने का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो कम गहरी नींद लेते हैं, जिसे स्लो-वेव स्लीप भी कहा जाता है।
स्टडी की प्रमुख खोज
मिनेसोटा स्थित मेयो क्लिनिक में किए गए एक नए अध्ययन के अनुसार जो लोग गंभीर स्लीप एपनिया से ग्रस्त थे और कम गहरी नींद लेते थे, उनमें मस्तिष्क की श्वेत पदार्थ को अधिक नुकसान हुआ। यह नुकसान उन लोगों की तुलना में अधिक था जो अधिक समय तक गहरी नींद लेते थे। मस्तिष्क की श्वेत पदार्थ में छोटे सफेद धब्बे, जिन्हें व्हाइट मैटर हाइपरइंटेंसिटीज़ कहा जाता है, मस्तिष्क के नुकसान को दर्शाते हैं।
स्टडी के सह-लेखक, डॉ. डिएगो कार्वाल्हो ने कहा कि गहरी नींद में बिताए गए समय में 10% की कमी से मस्तिष्क में श्वेत पदार्थ की हानि का स्तर लगभग 2.3 वर्षों की उम्र बढ़ने के समान था। इसके अलावा उन्होंने बताया कि स्लीप एपनिया और श्वेत पदार्थ के नुकसान के बीच संबंध केवल गंभीर मामलों में देखा गया, जबकि हल्के या मध्यम स्लीप एपनिया के मामलों में यह असर उतना महत्वपूर्ण नहीं था।
मस्तिष्क पर श्वेत पदार्थ के नुकसान का प्रभाव

श्वेत पदार्थ की हानि मस्तिष्क की जानकारी को संसाधित करने की क्षमता को धीमा कर सकती है, ध्यान केंद्रित करने और याद रखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि श्वेत पदार्थ के निम्न स्तर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कि डिप्रेशन, चिंता और चिड़चिड़ापन से भी जुड़ा हुआ है।
उत्तर पश्चिमी विश्वविद्यालय की फ़ीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन की नींद विशेषज्ञ, क्रिस्टन नट्सन ने कहा, यह स्टडी यह पुष्टि करता है कि नींद, विशेष रूप से गहरी नींद, ब्रेन की सेहत को दुरुस्त रखने में काफी हेल्पफुल है।
अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ाव
स्टडी में यह भी पाया गया कि खराब नींद की गुणवत्ता और हाई ब्लड प्रेशर के बीच संबंध है। हाई ब्लड प्रेशर मस्तिष्क में घावों या स्ट्रोक का कारण बन सकता है, जो मस्तिष्क के समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
डॉ. कार्वाल्हो के अनुसार स्लीप एपनिया के दौरान ऑक्सीजन का स्तर गिरता है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर, ब्लड प्रेशर और हृदय गति बढ़ जाती है। यह सभी परिवर्तन शरीर और मस्तिष्क में सूजन को बढ़ाते हैं और रक्त वाहिकाओं में बदलाव लाते हैं, जिससे स्ट्रोक और खराब रक्त आपूर्ति से मस्तिष्क में नुकसान हो सकता है।
समाधान की खोज
हालांकि मस्तिष्क में श्वेत पदार्थ को हुए नुकसान का कोई इलाज मौजूद नहीं है। कार्वाल्हो ने कहा कि हमें ऐसे तरीकों की खोज करने की आवश्यकता है जो इस नुकसान को रोक सकें या इसे और खराब होने से बचा सकें।
