अल्जाइमर बीमारी के बारे में तो आपने सुना होगा। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें दिमाग की कोशिकाएं मरने लगती हैं, ब्रेन का साइज कम होने लगता है जिसके कारण खाना-कपड़े पहनना, टॉयलेट तक जाना मरीज भूलने लगता है। ऐसे में बहुत से लोग इसे दिमाग की सबसे खतरनाक बीमारी मानते हैं लेकिन इसी की तरह खतरनाक बीमारी पार्किसन भी है, जिसका नाम कम लोग ही जानते हैं।

यह भी एक तरह की मानसिक बीमारी है। इसमें मरीज को चलने में दिक्कत होती है, उसकी बॉडी में कंपन और अकड़न होती रहती है, बॉडी बैलेंस करने में भी परेशानी आती है। शुरुआत में यह बीमारी तो नॉर्मल लगती है लेकिन बाद में गंभीर रूप ले लेती है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
कारण
. यह ब्रेन केमिकल डोपामाइन को नुकसान होने पर होती है।
. इसका कारण जेनेटिक भी हो सकता है।
. वातावरण में कुछ टॉक्सिक सबस्टांसेस के कारण पार्किंसन रोग हो सकता है।
. दूषित पानी पीने से भी पार्किंसन का खतरा रहता है।

. ऐसी जगहें जहां पानी में निकेल, प्रोमेथीन या अन्य टॉक्सिक एलिमेंट्स मौजूद होते हैं, वहां खतरा ज्यादा होता है।
.स्ट्रोक या इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या जैसी कुछ बीमारियां भी पार्किंसन बीमारी का कारण बन सकती हैं।
लक्षण
. बॉडी में कंपन होने लगती है उंगलियों, हाथ और शरीर के छोटे हिस्सों से कंपन शुरू होकर पूरे शरीर में फैल जाता है। मरीज सही तरह खड़ा भी नहीं हो पाता है।
. कुछ भी लिखने में दिक्कत होने लगती है, लिखते समय हाथों में कंपन या सही तरह से हाथ मूव भी नहीं कर पाता।

.काम करने की क्षमता अचानक से प्रभावित होने लगती है। मानसिक तौर पर इतनी थकान हो जाती है कि कुछ भी करने का मन नहीं करता है।
. पार्किसन में मांसपेशियों में अकड़ने लगती हैं।
. इस बीमारी में बोलने में दिक्कत होती है या बोलते समय सही तरह से सोच भी नहीं पाते।
. बोलते समय हकलाना और सही तरह सोच न पाना।
ऐसे करें बचाव
. एक स्वीडिश स्टडी के अनुसार, विटामिन-C और E से भरपूर फूड्स, ताजी सब्जियां खाने से आप इस बीमारी से अपना बचाव कर सकते हैं।
. पेस्टीसाइज केमिकल वाले फल और सब्जियां न खाएं, इससे पार्किंसन रोग का खतरा रहता है।
. अपनी सेहत की देखभाल करते रहें, इससे किसी तरह की समस्या होने का पता पहले ही चल जाएगा।
. डॉक्टर अक्सर पार्किसन बीमारी में ग्रीन टी पीने के लिए कहते हैं। इसमें कैफीन कम होती है, जिससे फायदा मिल सकता है।

. रोजाना एक्सरसाइज करने से भी पार्किसन की बीमारी का रिस्क कम होगा। योगा, वर्कआउट को डेली लाइफ का हिस्सा बनाएं।
