कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचाई, लाखों लोगों की जानें लीं और कई लोगों के अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचाया। इस वायरस ने जिस पैमाने पर तबाही मचाई, उसके निशान आज भी लोगों की जिंदगी पर गहरे हैं। कोविड-19 के कारण कई लोगों के फेफड़े और दिमाग बुरी तरह प्रभावित हुए। हालांकि दुनिया भर में वैक्सीन के आने के बाद कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन कोरोना वायरस का अंत नहीं हुआ है। इसके नए-नए वैरिएंट्स लगातार सामने आ रहे हैं, जो हर बार चुनौती बनकर उभरते हैं।
इसी समस्या को हल करने के लिए चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक नैनोवैक्सीन बनाई है, जो कोविड-19 के सभी प्रमुख वैरिएंट्स से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम हो सकती है। खास बात यह है कि यह नैनोवैक्सीन आने वाले वैरिएंट्स से भी बचाने का दावा करती है।
नैनोवैक्सीन: भविष्य की सुरक्षा के लिए नई तकनीक
वुहान इंस्टीट्यूट वही जगह है, जिसे लेकर यह कहा जाता है कि कोविड-19 वायरस वहीं से फैला था। हालांकि, अब इस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने एक इंट्रानेजल नैनोपार्टिकल वैक्सीन तैयार की है, जो इस वायरस के संक्रमण से बचाने में कारगर हो सकती है। यह नैनोवैक्सीन कोरोनावायरस के एपिटोप्स और ब्लड प्रोटीन फेरिटिन को जोड़ती है, जिससे इसका प्रभाव बढ़ जाता है।
इस नैनोवैक्सीन को बनाने वाली टीम का कहना है कि यह वैक्सीन कोरोनावायरस के डेल्टा, ओमिक्रॉन और वुहान में 2020 में पहचाने गए WIV04 जैसे वैरिएंट्स से सुरक्षा प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, यह वैक्सीन आने वाले संभावित खतरनाक वैरिएंट्स से भी बचाव में मददगार साबित हो सकती है।
कोरोना के प्रमुख वैरिएंट्स से सुरक्षा
शोधकर्ताओं का दावा है कि नैनोवैक्सीन कोविड-19 के मौजूदा वैरिएंट्स जैसे डेल्टा और ओमिक्रॉन के अलावा वुहान से शुरू हुए वैरिएंट WIV04 से भी बचाव कर सकती है। यह वैक्सीन उन एपिटोप्स को टारगेट करती है जो पहले से न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज के जरिए प्रोटेक्टेड होते हैं। इस कारण यह वैक्सीन बड़े स्तर पर सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम हो सकती है।
ACS नैनो नामक एक पियर-रिव्यू जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यह नैनोवैक्सीन भविष्य की महामारियों में भी एक अहम भूमिका निभा सकती है।
कोविड-19: आज भी एक बड़ा खतरा
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) और दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 की उत्पत्ति की जांच में पाया कि यह वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैला। हालांकि, अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने यह दावा किया था कि इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि कोरोना वायरस को चीन की वुहान लैब में बनाया गया था।
कोविड-19 के अलावा, इस सदी में कोरोना वायरस से जुड़ी अन्य बीमारियों में 2003 में फैला श्वसन सिंड्रोम (SARS) और 2012 में मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) भी प्रमुख हैं, जिनके कारण बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए थे। SARS और MERS भी कोरोनावायरस से ही फैलने वाली बीमारियां थीं।
नैनोवैक्सीन से भविष्य की महामारियों की रोकथाम की उम्मीद
शोधकर्ताओं का मानना है कि कोविड-19 के म्यूटेशन के कारण नए-नए वैरिएंट्स पैदा होते रहेंगे, जिनमें से कुछ अधिक संक्रामक और खतरनाक हो सकते हैं। यह संभावना भी जताई जा रही है कि भविष्य में ये वैरिएंट्स एक बड़ी महामारी का रूप ले सकते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ताओं ने इस नैनोवैक्सीन को विकसित किया है, ताकि भविष्य में आने वाले खतरों से निपटा जा सके। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैक्सीन एक व्यापक सुरक्षा प्रदान कर सकती है और कोविड-19 की भविष्य की चुनौतियों से निपटने में एक अहम हथियार साबित हो सकती है।
अगर यह नैनोवैक्सीन सफल होती है, तो यह न केवल वर्तमान कोविड-19 वैरिएंट्स से लड़ने में मददगार साबित होगी, बल्कि आने वाले समय में नए वैरिएंट्स के खतरे को भी कम कर सकती है।
