बढ़ते आत्महत्या के मामले, वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। हर साल दुनियाभर में लाखों लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं। भारत में भी ये समस्या बड़ी चिंता बनकर उभर रही है। एक नई रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में छात्र आत्महत्या भी वार्षिक दर तेजी से बढ़ी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2024 के आंकड़ों के अनुसार, कुल आत्महत्याओं की संख्या में सालाना 2% की वृद्धि हुई है, वहीं छात्र आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी का दर 4% से ज्यादा है। ये निश्चित तौर पर ही चिंताकारक विषय है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए योजना बनाने, विभिन्न गतिविधियों के जरिए से आत्महत्याओं को रोकने के प्रयास को लेकर लोगों को जागरूक करने लिए हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। तो चलिए आज आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि आप मन में आ रहे विचारों को कैसे नियंत्रित कर सकते हैं।
आत्महत्या के मामले रोकने में समाज की भूमिका
एक्सपर्ट्स की मानें तो आत्महत्या जैसे मामलों को रोकने के लिए में समाज के हर एक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। अपने आसपास रहने वाले, दोस्तों, रिश्तेदारों, साथ काम करने वाले लोगों की स्थिति को हम सभी अच्छे से समझ सकते हैं। ऐसे लोगों में चाहे वह मूड हो या व्यवहार या यहां तक कि उनके द्वारा कही गई बात सभी में कुछ अलग सा बदलाव या निराशा महसूस अगर हो तो उस पर ध्यान दें।

एक-दूसरे से तुलना न करें
मनोचिकित्सक का मानना है कि हमारा ध्यान बच्चों की क्षमताओं को बढ़ावा देने पर होना चाहिए, ताकि यह उनकी मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है। यह जरूरी है कि प्रत्येक संस्थान के अंदर एक व्यवस्थित, व्यापक और मजबूत करियर और कॉलेज परामर्श प्रणाली का निर्माण हो, मानसिक स्वास्थ्य सुधार जैसे विषयों को शिक्षण पाठ्यक्रम में भी जरूर शामिल करना चाहिए।
छात्रों में इसलिए बढ़ रहा है आत्महत्या की दर
छात्रों के बीच बढ़ती आत्महत्या का दर इन दिनों सुर्खियों में है। साल 2022 में कुल छात्र आत्महत्याओं में 53% पुरुष छात्र थे। हालांकि 2021 और 2022 के बीच पुरुष छात्र आत्महत्याओं में 6% की कमी आई, जबकि छात्राओं की आत्महत्या में 7% की वृद्धि हुई है। छात्रों पर पड़ रहा पढ़ाई का अनावश्यक दबाव, हमउम्र साथियों के साथ तुलना जैसी स्थितियां मानसिक तनाव को बढ़ा रही हैं। प्राथमिक स्तर पर छात्रों में आत्महत्या के रोकथाम के लिए माता-पिता की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

आत्महत्याओं को ऐसे रोकें
छात्रों के अलावा पारिवारिक कलह, आर्थिक तंगी भी आत्महत्या का एक कारण है। आत्महत्याओं को रोकने के लिए अपने आसपास के लोगों के व्यवहार पर गंभीरता से ध्यान दें। इनमें यदि किसी तरह का नेगेटिव बदलाव दिखे तो सावधान हो जाएं। उस व्यक्ति से बात करें, कभी-कभी सबसे अच्छा यही होता है कि आप ऐसे लोगों के साथ बस मौजूद रहें। उस व्यक्ति के लिए यह जानना कि कोई उसकी परवाह करता है और उसके साथ है, यह भी मन को शक्ति देता है और आत्महत्या के विचारों की तीव्रता को कम कर सकता है। जल्द से जल्द ऐसे लोगों को किसी पेशेवर मनोचिकित्सक की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करें। आपके थोड़े से प्रयास से किसी की जान बच सकती है।

