हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की एक नई रिपोर्ट ने किशोरों और युवाओं के बीच यौन सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। इस रिपोर्ट के अनुसार किशोरों द्वारा कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग घटता जा रहा है, जिससे असुरक्षित यौन संबंधों के जोखिम और अनचाही प्रेगनेंसी के मामले बढ़ सकते हैं। यूरोपीय और मिडिल ईस्ट के 42 देशों में किए गए एक सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है कि बड़ी संख्या में किशोर अब सुरक्षित यौन संबंध नहीं बना रहे हैं, जो एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का कारण बनता जा रहा है।
क्या कहता है WHO का सर्वेक्षण
WHO द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में 15 साल की उम्र के 2,42,000 किशोरों को शामिल किया गया। इस सर्वे के नतीजों ने बताया कि जिन लड़कों ने पिछली बार यौन संबंध बनाते समय कंडोम का इस्तेमाल किया था, उनका प्रतिशत 2014 में 70% था, जो 2022 में घटकर 61% रह गया। इसी तरह लड़कियों द्वारा कंडोम या गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल 63% से घटकर 57% रह गया है। ये आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि करीब एक तिहाई किशोर अब यौन संबंध बनाते समय कंडोम या अन्य गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, जिससे उनके लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया है।
कम हो रहा कंडोम का इस्तेमाल, बढ़ रहा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार साल 2014 से 2022 तक गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल लगभग स्थिर बना हुआ है, लेकिन कंडोम का उपयोग तेजी से घट रहा है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे सेक्स एजुकेशन की कमी, यौन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी, और सही जानकारी न मिलना। खासतौर पर लोअर मिडिल क्लास फैमिली के किशोरों में कंडोम या बर्थ कंट्रोल पिल्स का इस्तेमाल कम देखा गया। इनमें से 33% किशोर कंडोम या गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग नहीं करते, जबकि उच्च वर्ग के किशोरों में यह आंकड़ा 25% है। इसका अर्थ यह है कि आर्थिक स्थिति का भी यौन सुरक्षा पर प्रभाव पड़ता है।
सेक्स एजुकेशन की कमी एक बड़ी वजह
डब्ल्यूएचओ के यूरोप डायरेक्टर हैंस क्लूज ने इस रिपोर्ट के परिणामों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यूरोप के कई देशों में आज भी सेक्स एजुकेशन का अभाव है, जिसके कारण किशोर और युवा सुरक्षित यौन संबंध बनाने के महत्व को नहीं समझ पाते। सेक्स एजुकेशन न होने से युवा असुरक्षित यौन संबंधों के खतरों और उससे होने वाले नुकसान को नहीं समझ पाते, जिससे वे अधिक जोखिम भरे निर्णय लेते हैं। क्लूज का मानना है कि सेक्स एजुकेशन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि किशोरों को सही समय पर जानकारी मिल सके और वे अपने स्वास्थ्य की सुरक्षा कर सकें।
गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा
असुरक्षित यौन संबंध बनाने से न केवल अनचाही प्रेगनेंसी का खतरा बढ़ता है, बल्कि इससे यौन संचारित बीमारियों (STDs) का भी खतरा बढ़ जाता है। इनमें HIV/AIDS, गोनोरिया, सिफलिस जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं, जो लंबे समय तक न केवल व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को प्रभावित करती हैं बल्कि समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। WHO की रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि इन जोखिमों को कम करने के लिए किशोरों में यौन सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
क्या हो सकता है समाधान
इस स्थिति को सुधारने के लिए आवश्यक है कि स्कूलों और समुदायों में सेक्स एजुकेशन को अनिवार्य किया जाए। किशोरों और युवाओं को कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक उपायों के बारे में सही जानकारी दी जानी चाहिए। इसके अलावा सरकारों को भी इस मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि यौन सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार हो सके।
WHO की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि यौन स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसलिए इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है, ताकि किशोरों और युवाओं को सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जीने का अवसर मिल सके।
