हाल ही में भारतीय मूल की 19 वर्षीय किशोरी सुदीक्षा थिरुमलेश जो दुर्लभ माइटोकॉन्ड्रियल विकार से पीड़ित थी, ने मरणोपरांत ब्रिटेन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) ट्रस्ट के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कानूनी अपील जीत ली है। यह मामला न केवल सुदीक्षा के जीवन की दृढ़ निश्चयी का प्रतीक है, बल्कि भविष्य में इसी तरह की परिस्थितियों में रोगियों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।
क्लीनिकल ट्रायल के लिए कनाडा जाने की अनुमति
आपको बता दें कि सुदीक्षा की स्थिति गंभीर थी, और वह लाइफ-लॉंग पैलिएटिव केयर में स्थानांतरित किए जाने के खिलाफ लड़ रही थी। उसे कनाडा में संभावित क्लीनिकल ट्रायल के लिए जाने की अनुमति चाहिए थी, जिससे वह अपने जीवन को लम्बा जीने की उम्मीद कर रही थी। वहीं सुदीक्षा की इच्छा थी कि उसे हर संभव सक्रिय चिकित्सा सहायता मिले, और वह अपनी बीमारी के खिलाफ लड़ाई में सभी प्रायोगिक उपचारों को आजमाना चाहती थी। यह दृढ़ निश्चय उसके परिवार और चिकित्सकों के साथ उसके सर्वोत्तम हित को लेकर असहमति का कारण बना।
सुदीक्षा के पास निर्णय लेने की थी मानसिक क्षमता
बता दें कि न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि सुदीक्षा के पास अपने उपचार से संबंधित निर्णय लेने की मानसिक क्षमता थी। तीन न्यायाधीशों की पीठ जिसमें न्यायमूर्ति एलेनोर किंग, लॉर्ड जस्टिस रबिंदर सिंह, और लॉर्ड जस्टिस जोनाथन बेकर शामिल थे, ने इस निर्णय पर सहमति जताई कि सुदीक्षा के मामले में उसकी इच्छाएं महत्वपूर्ण थीं। सुदीक्षा ने कोविड-19 संक्रमण के कारण लंबे समय तक आईसीयू में बिताया, बावजूद इसके वह ए लेवल की पढ़ाई कर रही थी। अदालत ने उसे एक असाधारण युवती के रूप में वर्णित किया, जो दृढ़ निश्चयी, मेहनती और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाली थी।
परिवारजन ने भी सर्वोत्तम इलाज की मांग की
सुदीक्षा के माता-पिता, थिरुमलेश चेल्लामल हेमचंद्रन और रेवती मलेश थिरुमलेश, और भाई वर्धन थिरुमलेश, सभी ने उसके लिए सर्वोत्तम इलाज की मांग की थी। उनके प्रयासों का फल यह महत्वपूर्ण कानूनी जीत है, जिसने सुदीक्षा की इच्छाओं को मान्यता दी और भविष्य के रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया।
सुदीक्षा बनी लोगों के लिए प्रेरणा
यह मामला सुदीक्षा के साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है, जो अपनी भयानक बीमारी के बावजूद जीवन जीने की कोशिश कर रही थी। उसकी कहानी न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक नई दिशा की ओर इशारा करती है, बल्कि जीवन के प्रति एक अनोखे जज्बे को भी दर्शाती है। सुदीक्षा का जीवन और संघर्ष हमें याद दिलाता है कि किसी भी परिस्थिति में, जीवन की आशा और इच्छाशक्ति अटूट रहनी चाहिए।
क्या होता है माइटोकॉन्ड्रियल विकार
माइटोकॉन्ड्रियल विकार एक ऐसी कंडीशन है जो शरीर में काम करने वाली माइटोकॉन्ड्रियल के काम को इफेक्टिव करती है। आपको बता दें कि माइटोकॉन्ड्रिया शरीर में ऊर्जा बनाने का काम करती है। ऐसे में जब माइटोकॉन्ड्रिया शरीर में ऊर्जा बनाने का काम सही से नहीं करती है, तो इससे शरीर के अंगों को काम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं माइटोकॉन्ड्रियल रोग आपके शरीर के लगभग किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है, जिनमें आपकी कोशिकाएं भी शामिल हैं।
क्या है माइटोकॉन्ड्रिया विकार के लक्षण
मांसपेशियों से जुड़ी समस्या होना
सुनने और देखने में दिक्कत होना
सही से बॉडी का विकास न होना
दस्त या कब्ज की समस्या रहना
उल्टी जैसा अनुभव होना
निगलने में कठिनाई होना
दौरे और माइग्रेन की समस्या होना
सांस से संबंधी समस्याएं
बेहोशी की समस्या होना
