केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से आये दिन कुछ न कुछ नई नई चीजें होती रही हैं। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग अपने मरीजों को बेहतर सुविधा देने के भी नये प्रयास करता रहता है। इसी कड़ी में अब दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में मरीजों को और भी बेहतर सुविधा देने के लिए अत्याधुनिक इंडोयूरोलॉजिकल यूनिट शुरू कर दी गयी है। इससे पथरी और प्रोस्टेट के इलाज के लिए यूज़ किया जायेगा। वहीँ अस्पताल में किडनी की पथरी व प्रोस्टेट की लेजर सर्जरी की सुविधा फ्री में मरीजों को दी जाएगी। साथ ही किडनी की पथरी व प्रोस्टेट की बीमारी से जूझ रहे मरीजों की बिना चीरा लगाये लेजर सर्जरी की जाएगी।
लाखों का खर्च होता था
आपको बता दें ज्यादातर निजी अस्पतालों में किडनी की पथरी के इलाज के लिए लेजर सर्जरी की सुविधा पहले से ही उपलब्ध है। निजी अस्पतालों में लेजर सर्जरी के लिए डेढ़ लाख से दो लाख रुपये का खर्च आता है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में इस सुविधा का अभाव होने से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना होता था। लेकिन अब इस अस्पताल में फ्री में ये सुविधा मिलने से मरीजों को थोड़ी राहत तो मिली ही है।
एम्स के यूरोलॉजी विभाग में लिथोट्रिप्सी सर्जरी की सुविधा मौजूद
सर्जरी के लिए लाखों का खर्च सुनकर मरीज अपना इलाज नहीं करवा पाते थे। लेकिन अब एम्स के यूरोलॉजी विभाग में लिथोट्रिप्सी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होने से वे अपना इलाज आसानी से करवा सकते हैं। वहीँ इस तकनीक से बगैर कोई चीरा लगाए या एनेस्थीसिया दिए बगैर एक सेंटीमीटर तक की पथरी को किडनी से निकाला जा सकता है। इससे मरीजों और उनके परिवारवालों की किसी काफी सहूलियत हो गयी है।
बिना दवा के भी पथरी निकल जाती है
आपको बतादें आरएमएल अस्पताल के यूरोलाजी के विभागाध्यक्ष डा. हेमंत कुमार गोयल ने बताया कि पांच से आठ मिलीमीटर (0.5-0.8 सेंटीमीटर) तक की पथरी सर्जरी के बगैर दवाओं की मदद से भी निकल जाती है। इससे बड़ी पथरी को निकालने के लिए सर्जरी की जरूरत होती है। ऐसे में इस सुविधा के उपलब्ध होने से मरीजों को काफी लाभ मिल सकेगा।
लेज़र से आसानी से निकाल दी जाती है पथरी
आपको बता दे पहले के समय में किडनी की पथरी निकालने के लिए पीठ पर छोटे छेद कर लेप्रोस्कोपी तकनीक से सर्जरी की जाती है। लेकिन अब अस्पताल में दो सेंटीमीटर तक की पथरी को लेजर सर्जरी से निकालने में काफी आसानी हो गयी है। इस प्रोसीजर में मरीज के यूरिनरी ट्रैक के रास्ते से एक फाइबर किडनी के पास ले जाकर लेजर से पथरी को तोड़ दिया जाता है। वहीँ इस प्रोसेस में करीब डेढ़ घंटे का समय लगता है। उन्होंने बताया कि विभाग के डॉक्टरों को लेजर सर्जरी का पूरा प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही अस्पताल में आयोजित कार्यशाला में 16 मरीजों की किडनी व प्रोस्टेट की लेजर सर्जरी की जा चुकी है।
किडनी की पथरी की सर्जरी के लिए एक वर्ष तक की वेटिंग
डाक्टर ने बताया कि इस सुविधा के आने के बाद से अस्पताल में किडनी की पथरी की सर्जरी के लिए एक वर्ष तक की वेटिंग चल रही है। अभी यूरोलाजी विभाग के दो ऑपरेशन थियेटर हैं। निर्माणाधीन सुपर स्पेशियलिटी के तैयार होने पर यूरोलॉजी के तीन ऑपरेशन थियेटर होंगे। इसलिए 30 से 40 प्रतिशत सर्जरी बढ़ जाएगी। तब सर्जरी की वेटिंग कम होने की सभावना हो सकेगी।
