बीते दिनों अमीबिक मेनिंगोएनसेफेलाइटिस के कई मामले केरल में सामने आये हैं। जिसे देखते हुए अब केरल राज्य ने इसकी रोकथाम, डाइग्नोस और ट्रीटमेंट को लेकर गाइडलाइन जारी कर दी है। वहीँ ऐसा पहली बार हुआ है कि देश में इस बीमारी को लेकर किसी भी तरह के दिशानिर्देश दिए गये हैं। बता दें इस निर्देश को जारी करने के पीछे का उद्देश्य इस घातक बीमारी को कंट्रोल करना है। ये बीमारी दूषित पानी में पाए जाने वाले फ्री-लिविंग अमीबा के कारण इंसानों में होती है। जिसकी चपेट में आने से व्यक्ति की मौत तक हो जाती है।
केरल ने जारी की गाइडलाइन
अगर किसी में मैनिंजाइटिस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो रोगी से पिछले 14 दिनों के भीतर ताजे पानी के संपर्क में आने के बारे में पूछें, इस कदम से ट्रीटमेंट करने में मदद मिलेगी
रोगी से ये भी पूछा जाना चाहिए कि क्या वे तालाब, नदी, झरने जैसी चीजों में नहाएं हैं, अगर हां तो नेगलेरिया फाउलेरी को लेकर उनकी जांच करें
ऐसे मामलों में जहां बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस के रोगी एंटीबायोटिक दवाओं से ठीक नहीं हो रहे हैं या उनकी हालत बिगड़ रही है तो प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस पर विचार होना चाहिए
सभी टर्बिड या ओपलेसेंट CSF सैंपल की वेट माउंट जांच अनिवार्य है, इससे जल्दी पता लगाने में मदद मिलेगी और जल्द ट्रीटमेंट हो पायेगा
अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस मामलों की सूचना जिला निगरानी अधिकारी को दी जानी चाहिए, अगर जरूरी हो तो पीसीआर और जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल भेजे जाएं
PAM के ट्रीटमेंट में एक बड़ी टीम शामिल करें, जिसमें चिकित्सक, बाल रोग विशेषज्ञ, इंटेंसिविस्ट, संक्रामक रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट और माइक्रोबायोलॉजिस्ट शामिल हों
आखिर क्या है अमीबिक मेनिंगोएनसेफेलाइटिस
बता दें अमीबिक मेनिंगोएनसेफेलाइटिस एक ब्रेन इंफेक्शन है जो नेगलेरिया फाउलेरी अमीबा की वजह से फैलता है। ये आमतौर पर झीलों, नदियों और गर्म झरनों जैसी जगहों पर ही मिलता है। इंफेक्शन आमतौर पर तब होता है जब दूषित पानी नाक के जरिये शरीर में चला जाता है। इससे दिमाग में गंभीर सूजन होने लगतो है। ये बीमारी बड़ी तेजी से बढ़ती है, वहीँ इसका कोई तुरंत इलाज मौजूद ही नहीं है।
