हाल ही में हाथ-पैर-मुंह बीमारी (HFMD) का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई है। यह संक्रमण खासकर बच्चों में पाया जाता है, लेकिन बड़े भी इससे अछूते नहीं हैं। यह रोग एक वायरल संक्रमण है, जो आमतौर पर एंटरवायरस के कारण होता है। इसकी संक्रामकता और लक्षणों की गंभीरता के कारण इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे आपको इस बीमारी के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। चलिये इसके बारे में जानते हैं।
संक्रमण का प्रसार
HFMD का संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के थूक, नाक के स्राव, मल, या संक्रमित सतहों के संपर्क में आने से फैल सकता है। बच्चों में यह बीमारी अधिक फैलती है क्योंकि वे स्कूल, डे-केयर सेंटर, या खेल के मैदानों में एक-दूसरे के करीब रहते हैं और सामान साझा करते हैं।
HFMD के नजर आने वाले लक्षण
अगर हम हाथ-पैर-मुंह बीमारी के लक्षण की बात करें तो ये संक्रमण के कुछ दिनों बाद दिखाई देते हैं। इस संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में बुखार, गले में खराश, और थकान शामिल हैं। बुखार के एक या दो दिन बाद मुंह के अंदर छोटे, दर्दनाक छाले, हाथों और पैरों पर लाल चकत्ते दिखाई देने लगते हैं। कभी-कभी ये चकत्ते घावों में बदल जाते हैं। यही नहीं कुछ मामलों में यह चकत्ते कूल्हे और पैरों के तलवों पर भी हो सकते हैं।
HFMD का इलाज क्या है
HFMD के लिए कोई सटीक इला नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। बुखार और दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर पैरासिटामोल या इबुप्रोफेन जैसे दर्दनिवारक दवाओं की सलाह देते हैं। मुंह के घावों के कारण होने वाले दर्द को कम करने के लिए ठंडे पेय और बर्फ के टुकड़े मददगार हो सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
HFMD से बचने के उपाय
साफ सफाई का ध्यान रखें
बीमार बच्चों को अलग रखें
अगर किसी बच्चे में HFMD के लक्षण दिखाई दें तो उन्हें बाहर जाने न दें
व्यक्तिगत सामान साझा न करें
