आप और हम सब ने पॉपकॉर्न तो खाए ही हैं। वहीँ जब हम सिनेमा में मूवी देखने के लिए जाते हैं तो वहां खाने के लिए पॉपकॉर्न लेते हैं। लेकिन आपको बता दें आज कल एक term बहुत ही ज्यादा चर्चा में हैं, वो है पॉपकॉर्न ब्रेन। दरअसल मेंटल हेल्थ की दुनिया में ये टर्म काफी सुनने को मिल रहा है। आखिर क्या है ये पॉपकॉर्न ब्रेन। क्यों आज कल इसकी चर्चा हो रही है। तो चलिए जानते हैं।
आखिर क्या है पॉपकॉर्न ब्रेन
क्या आपने कभी किसी बर्तन में पॉपकॉर्न बनते हुए देखा है? जैसे ही बर्तन में गर्मी बढ़ती है, मक्के के दाने पॉपकॉर्न बन उछलने लगते हैं। कुछ ऐसा ही सोशल मीडिया और फोन की वजह से हमारा दिमाग भी हो रहा है। कहने का मतलब ये कि फोन में हर थोड़ी देर में अलग-अलग नोटिफिकेशन आने लगते हैं। जैसे-जैसे हमारा अटेंशन स्पैन कम होने लगा है, हमारे दिमाग में अलग-अलग विचारों की विंडो पॉपकॉर्न की तरह पॉप होने लगती हैं।
सिर्फ आपका ही नहीं, जिन बच्चों को आप मोबाइल दिखाकर खाना खिला रहे हैं, वो भी ऐसी ही हालत का शिकार हो रहे हैं। बता दें पॉपकॉर्न ब्रेन एक मानसिक स्थिति है जिसमें दिमाग में तेजी से एक के बाद एक विचार आने लगते हैं। ऐसे में ब्रेन किसी एक विचार पर स्थिर नहीं रह पाता है। यह ठीक उसी तरह होता है, जैसे पकने पर पॉपकॉर्न के दाने फूटते हैं। इससे हमारे दिमाग के लिए एक समय में एक ही चीज पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है। दिमाग की ये हालत हमारी प्रोडक्शन और रचनात्मकता को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
पॉपकॉर्न ब्रेन की परेशानी
बता दें सोशल मीडिया के रील्स और शॉर्ट्स पॉपकॉर्न ब्रेन की समस्या को बढ़ाने का काम कर रही है। हर 30 सैकंड में बदलने वाली ये रील्स हमें लगातार कुछ नया देखने की तरफ आकर्षित करती है। इसकी वजह से हमारा दिमाग किसी भी एक जगह टिक नहीं पाता। वहीँ एक्सपर्ट के मुताबिक 30 सैकंड में एक नया रील जब आप देखते हैं, तो ये हमारे ब्रेन को लगताार stimulate करता है। वहीँ इससे एक्साइटमेंट मिलता है साथ ही हमारा मस्तिष्क डोपमिन रिलीज करता है। डोपमिन वो हार्मोन है जो हमारे अंदर एक्साइटमेंट रिलीज करता है।
6 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया मतलब डिप्रेशन
आपको सुनने में लगेगा कि ये तो अच्छा है कि डोपमिन रिलीज हो रहा है और हम खुश हो रहे हैं। लेकिन दरअसल लगातार आती ये खुशी आपके ब्रेन को हमेशा एक्टिव रखती है। इसके कारण सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। इसकी वजह से डिप्रेशन और एनजाइटी के मामले बढ़ रहे हैं। इसके अलावा इसकी वजह से नींद न आने की बीमारी भी बढती जा रही है। रिसर्च ये कहता है कि अगर आप 6 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपके डिप्रेशन में जाने के चांस 11% बढ़ जाते हैं। वहीँ एनजाइटी और इनसोमेनिया के चांस 6 गुना बढ़ जाते हैं।
पॉपकॉर्न ब्रेन के लक्षण
ध्यान भटकना
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
हर समय तनाव में रहना
इसके बचाव के उपाय
सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लिमिट में करें
माइंडफुलनेस प्रैक्टिस करें
फिक्स शेड्यूल बनाएं
स्वीमिंग, जिम, कोई स्पोर्ट्स ऐसी चीजें करें जिन्हें करते वक्त आप अपना मोबाइल न यूज करें
