भारत में ऐसे कई लोग हैं जिन्हें आज भी एक टाइम का खाना भी सही से नसीब होता है। ऐसे में भारत में भोजन की आधी बर्बादी से जुड़ी समस्या एक गंभीर चिंता बनी हुई है। नए रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल लगभग 67 मिलियन टन खाना बर्बाद हो जाती हैं, जिससे लगभग 15 करोड़ लोगों का पेट आसानी से भरा जा सकता है। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार भोजन की बर्बादी को आधा करने से कृषि क्षेत्र से हो रहे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में चार फीसदी की कमी आ सकती है।
भारतीय कृषि क्षेत्र को अधिक प्रभावित
इस समस्या के चलते, विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य उत्पादन का तिहाई हिस्सा नष्ट हो जाता है, जिससे कृषि और खाद्य संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता है। यह समस्या खासकर भारतीय कृषि क्षेत्र को अधिक प्रभावित करती है, क्योंकि यहां खाद्य उत्पादन अधिकतम रहता है और बर्बादी का भीतरी कारण विभिन्न कारणों से होती है। जिससे भारत में लोगों को सही से खाना भी नसीब नहीं होता है और वो कई बीमारियों के शिकार होने लगते हैं।
खाना को बर्बाद होने के उपाय
बर्बाद होने वाले खाद्य पदार्थों के प्रमुख कारणों में से एक बात यह है कि उनके भंडारण, परिवहन और वितरण की अपेक्षा में कमी होती है। इसके अतिरिक्त, कुछ क्षेत्रों में अनुचित भंडारण सुविधाएं और अपर्याप्त प्रौद्योगिकी भी बर्बादी का मुख्य कारण बनती हैं।
सरकार और समाज को इस समस्या को हल करने के लिए सम्मिलित काम करने की जरूरत है। खाद्य बर्बादी कम करने के लिए उचित भंडारण, परिवहन और वितरण सुविधाएं विकसित करने के साथ-साथ, किसानों को नई तकनीकियों और संवेदनशील खेती तकनीकों की समर्थन भी दी जानी चाहिए।
इस प्रकार, समस्या को समझकर और समुदाय के सहयोग से, भारत सकारात्मक दिशा में बदल सकता है और खाने को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है।
