आये दिन मेडिकल की दुनिया में कोई न कोई नई स्टडी सामने आती ही रहेती है। अब ऐसे में भारत बायो का रोटावैक को लेकर एक नई स्टडी सामने आई है। जिसमे कहा गया कि कंपनी द्वारा स्वदेशी रोटावायरस वैक्सीन रोटावैक का इस्तेमाल बच्चों के लिए सही नहीं है। अगर ये इंजेक्शन बच्चों को दिया जाता है तो उनकी आंत में इंटससेप्शन का होने का खतरा बढ़ जाता है। इधर भारत बायोटेक ने स्टडी में जताए गये तमाम दावों को खारिज कर दिया है।
स्टडी में क्या हुआ खुलासा
बता दें रोटावैक को लेकर इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिस्क एंड सेफ्टी इन मेडिसिन में पब्लिश स्टडी में कहा गया कि बच्चों में रोटावैक का टीकाकरण करने से इंटससेप्शन के जोखिम में 1.6 गुना वृद्धि हुई थी, जिसे पहले के विश्लेषण में अनदेखा कर दिया गया था। इस समस्या इंटससेप्शन को समझे तो बच्चों दिखने वाली वह समस्या जिसमें आंत अपने आप में फंस जाती है और अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो आंत में गैंग्रीन या जान जाने के खतरा भी बढ़ जाता है।
नुकसान काफी अधिक है
जो भी रोटावैक वैक्सीन को लगवा रहे हैं उन्हें समस्या आने पर पेचिश न समझे, इसका जोखिम भयानक हो जाता है। इस स्थिति में सर्जिकल इमरजेंसी करने के साथ ही इसका इलाज तुरंत करना बेहद जरूरी है। इसे लेकर पहले की गई स्टडी में पाया गया था कि, रोटावायरस वैक्सीन से इंटससेप्शन का कोई जोखिम नहीं था। 21 दिनों में भी किसी भी प्रकार की हेल्थ समस्या का खतरा नहीं था।
भारत बायोटेक ने पेश की सफाई
रोटावैक को लेकर आ रहे इस तरह के अध्ययन को लेकर भारत बायोटेक कंपनी ने अपना बयान जारी किया है, जिसमें कहा कि, रोटावैक का सुरक्षा के लिए हज़ारों लोगों पर मूल्यांकन या ट्रायल किया गया है। इस रोटावैक को 40 साल की अवधि में विकसित किया गया और इसके विकास से जुड़े डेटा को पिछले कुछ दशकों में NEJM और लैंसेट जैसी उच्च प्रभाव वाली सहकर्मी समीक्षा वाली पत्रिकाओं में बड़े पैमाने पर प्रकाशित किया गया है। इस प्रकार से रोटावैक वैक्सीन से किसी प्रकार का खतरा व्यक्ति को नहीं होता है। वहीँ इसके इस्तेमाल को लेकर भारतीय कंपनी भारत बायोटेक ने स्टडी में जताए तमाम दावों को खारिज किया है।
