गर्मी इतनी ज्यादा है कि हर कोई खुद को ठंडा रखने के लिए कई तरह की चीजें करता है। ऐसे में कुछ लोग शरीर को ठंडा रखने के लिए मौसमी फलों का सेवन करते हैं। जिसमे सबसे खरबूजा का नाम आता है। यहां बता दें एक तरफ खरबूजा फल काफी पसंद किया जाता है, तो वहीँ दूसरी तरफ कहावत भी बोली जाती है कि खरबूजा खरबूजे को देख कर रंग बदलता है। ये आप सबसे बहुत बार कई लोगों के मुहं से सुनी भी होगी। आम भाषा में इसका यूज़ यह बताने के लिए किया जाता है कि एक को देखकर या उसके असर से दूसरा भी उसी की तरह बन गया इसका सीधा मतलब यह है कि दूसरे को कुछ करते हुए देख कर उसकी नकल करते हुए ठीक वैसा ही काम करना।

यह कहावत आमतौर पर इंसानों के लिए ही बनी है। इस मुहावरे का प्रयोग खरबूजों के लिए भी किया जाता है जिसका अर्थ है जब खरबूजे के फल के पकने की ऋतु आती है तो एक खरबूजा जिसका फूल सबसे पहले आया था। वह सबसे पहले पकना शुरू हो जाता है और उसका रंग हरे से पीला में बदलने लगता है। जिसका साफ संकेत है कि खरबूजा पकना शुरू हो गया। इस प्रक्रिया के ठीक बाद अन्य खरबूजे भी पकने लगते हैं, शायद इसलिए भी इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है कि “खरबुजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है”।

वैज्ञानिक आधार की मानें

वहीँ अगर वैज्ञानिक आधार की बात करें तो एथिलीन जो की एक गैसियस कंपाउंड है। जो फलों को पकाने के लिए यूज़ किया जाता है। पके हुए फल इस एथिलीन कंपाउंड को रिलीज करते हैं जिसका उसके आस पास के फल पर भी असर पड़ता है। कई बार ऐसा भी होता है की फल पकने और बहुत ज्यादा पक कर सड़ने लगते हैं तो उनके आस पास के फलों पर भी उनका साफ असर दिखाई देता है। जिसका मुख्य कारण एथिलीन जो की गैसियस कंपाउंड (प्लांट हार्मोन) है। प्लांट हार्मोन जब रिलीज होता है तो उसके आस पास के फल पर भी उसका असर पड़ता है। मतलब उसके आस पास वाले फल भी पकने लगते हैं। तो हम कह सकते हैं कि ये बात वैज्ञानिक रूप से भी सत्य है कि “खरबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदलता है” जिसका मतलब है कि खरबूजे को देख कर खरबूजा पकने लगता है। एक पके हुए फल के वजह से दूसरा फल भी पकने लगता है जिसका कारण एथिलीन हार्मोन माना जाता है।

By tnm

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