जब घर में बच्चा जन्म लेता है तो हर कोई बहुत ही ख़ुशी मनाता है। लेकिन अगर उसी बच्चे को कोई जन्मजात बीमारी हो जाये तो घर वाले चिंता में पड़ जाते हैं। खैर मांबाप के लिए तो उसका बच्चा हर हाल में पसंद होता है। फिर चाहे उसे कोई भी बीमारी क्यों न हो। एक ऐसा ही मामला सामने आया है दिल्ली एम्स से जहां एक साल की बच्ची इबादत को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1 यानि इस बीमारी में बच्चा अपने सिर को सहारा देने या बिना मदद के बैठने में सक्षम नहीं होता है। वहीँ इबादत के इलाज के लिए लगभग 14.5 करोड़ रूपए खर्च होने हैं। ऐसे में इबादत के मांबाप के पास इतने पैसे नहीं हैं, कि वो इतना महंगा इलाज इबादत का करवा पायें। इसी को देखते हुए मोहाली में आज इबादत के मांबाप ने एक डॉक्टर की हेल्प से प्रेस कांफ्रेंस की है जिसमे उन्होंने इलाज के लिए मदद की गुहार लगायी है। आईये जानते हैं आखिर यह बीमारी कितनी खतरनाक है। क्यों इसके इलाज में करोड़ों रुपये लग जाते हैं और इसके लक्षण क्या हैं।

आखिर ये स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी होता क्या है

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक आनुवंशिक बीमारी है। इस बीमारी के कई प्रकार होते हैं। लेकिन इसमें टाइप-1 सबसे गंभीर होता है। इस बीमारी में बच्चा अपने सिर को सहारा देने या बिना मदद के बैठने में सक्षम नहीं होता है। उसके हाथ और पैर ढीले हो सकते हैं और कुछ भी निगलने में समस्या हो सकती है। सांस को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों में कमजोरी के कारण, टाइप 1 एसएमए वाले अधिकांश बच्चे दो साल से अधिक जीवित नहीं रह पाते हैं।

इसके लक्षण क्या हैं

जो बच्चे स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1 से पीड़ित होते हैं, उनकी मांसपेशियां काफी कमजोर हो जाती हैं। शरीर में पानी की कमी होने लगती है और स्तनपान करने में और सांस लेने में उन्हें दिक्कत का सामना करना होता है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की मांसपेशियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि वो हिलने-डुलने लायक भी नहीं रहते हैं। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी बीमारी के कारण बच्चे धीरे-धीरे इतने अक्षम हो जाते हैं कि उन्हें सांस तक लेने के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है।

कितनी खतरनाक है ये बीमारी

बता दें स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1 काफी खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी के लिए जिम्मेदार जीन शरीर में तंत्रिका तंत्र के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक प्रोटीन के निर्माण करने के लिए रोकते हैं या बाधित करते हैं। जिसके परिणामस्वरूप तंत्रिका तंत्र नष्ट हो जाता है और पीड़ित बच्चों की मौत हो जाती है।

इलाज कैसे होता है

इस बीमारी के लिए खास इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। इस खास इंजेक्शन को अमेरिका से मंगाया जाता है। जो काफी महंगा होता है। बता दें इबादत को लगने वाले इस इंजेक्शन की कीमत करीब 14.5 करोड़ है। यह इंजेक्शन बच्चों की मांसपेशियों को कमजोर कर उन्हें हिलने-डुलने और सांस लेने में समस्या पैदा करने वाले जीन को इनएक्टिव  कर देता है। साथ ही यह नर्व सेल्स के लिए जरूरी प्रोटीन का प्रोडक्शन शुरू कर देता है। इसके बाद बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास सामान्य रूप से होने लगता है। इस इंजेक्शन का नाम जोलजेस्मा (Zolgensma) है।

By tnm

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