गर्मी कितनी भी क्यों न हो, ऐसे में बहुत से लोगों को एसी में बैठने के आदत होती है। जिसका कुछ नेगेटिव असर उनकी सेहत पर भी पड़ता है। बता दें लंबे समय तक एसी का उपयोग त्वचा और सांस से जुडी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में हेल्थ मिन्स्ट्री की तरफ से चेतावनी भी दी गयी है, कि एसी का उपयोग ज्यादा देर तक न करें। वहीँ शहरीकरण और बढ़ती आय के साथ अधिक लोग गर्मी से निपटने के लिए एसी पर ही भरोसा करते हैं।
एसी में स्किन की ड्राईनेस बढती है
बता दें एयर कंडीशनर जल वाष्प के संघनन के माध्यम से हवा को ठंडा करके और ह्यूमिडिटी को कम करने का काम करता है। ऐसे में इसके प्रोसेस से तःन्दी हवा मिलती है और काफी आराम मिलता है। वहीं यह विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म देने का काम करता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक लंबे समय तक एसी के संपर्क में रहने से सूखी, परतदार और खिंची हुई त्वचा होने लगती है। जो सिरदर्द, सूखी खांसी, चक्कर आना और मतली जैसी हेल्थ प्रॉब्लम का कारण भी बनती है। इसके अलावा हर समय परेशानी और थकान का भी एहसास होता है।
अन्य लक्षण
इन लक्षणों के अलावा एसी का यूज़ सांस संबंधी स्थितियों जैसे
एलर्जिक राइनाइटिस और अस्थमा को बढ़ाने का कम भी करता है
एसी का सही रखरखाव न होने पर संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
चिकित्सा विशेषज्ञ लंबे समय तक एयर कंडीशनिंग के संपर्क में रहने के खिलाफ दृढ़ता से सलाह देते हैं।
ये भी बता दें फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम के मुताबिक घरेलू एसी कूलिंग सिस्टम और बैक्टीरिया कंटैमिनेशन के बारे में अधिक डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ बैक्टीरिया कूलिंग कॉइल्स पर बायोफिल्म बनाते हैं और 90 प्रतिशत से अधिक समय तक एसी के संपर्क में रहने वाले मनुष्यों में इन्फेक्शन को पैदा करते हैं।
इसके अलावा गर्म वातावरण से अचानक ठंडे एसी कमरे में जाने से ब्रोन्कोकन्स्ट्रिक्शन यानि सांस लेने में दिक्कत आना शामिल है, ये विशेष रूप से अस्थमा से पीड़ित व्यक्तियों के लिए चिंताजनक का विषय है।
इस खतरे को कैसे कम करें
एसी फिल्टर की नियमित सफाई करें
वेंटिलेशन का ध्यान रखें
हर दो घंटे में एसी बंद करके दोबारा चला लें
इन कदमों को उठाने से एयर कंडीशनिंग का प्रभाव ज्यादा देर तक रहता है और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है।
