सीपीआर एक ऐसी तकनीक है जिसकी मदद से कार्डियक अरेस्ट से पीड़ित लोगों की जान बचाई जा सकती है। दरअसल बीते कुछ सालों में खराब लाइफस्टाइल और खराब खानपीन की वजह से लोगों में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले काफी बढ़े हैं। वहीं यह प्रॉब्लम कई बार इतनी खतरनाक हो जाती है कि पेशेंट को अस्पताल ले जाने या डॉक्टर बुलाने तक का मौका नहीं मिलता है। ऐसे में सीपीआर की मदद से मात्र तीन मिनट के अंदर उस व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। इसलिए हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स को सीपीआर ट्रैनिंग देने की अपील की है ताकि आपातकालीन स्थिति में स्टूडेंट्स पीड़िता की जान बचा सके।
यूजीसी ने X पर शेयर की पोस्ट
बता दें कि यूजीसी ने सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के प्रिंसिपल को X पर भी पोस्ट शेयर कर नोटिस जारी किया है। जिसमें लिखा है कि डॉक्टरों और मेडिकल की फील्ड से जुड़े अन्य विशेषज्ञ की हेल्प सभी स्टूडेंट्स, फैकल्टी और स्टाफ को बेसिक लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग दी जाए। हालांकि यूजीसी के नोटिस के मुताबिक देश में सिर्फ 0.1% लोग ही बीएलएस तकनीक के बारे में जानते हैं। ऐसे में एजुकेशन सेक्टर में इसे शामिल करने से हार्ट अटैक से मरने वाले लोगों की जान बचाई जा सकती है।
क्या है सीपीआर

सीपीआर देने के लिए सबसे पहले पीड़ित को किसी ठोस जगह पर लिटा दें। अब उसकी नाक और गला चेक कर ये सुनिश्चित करें कि उसे सांस लेने में कोई रुकावट तो नहीं है। जीभ अगर पलट गयी है तो उसे सही जगह पर उंगलियों के सहारे लाएं। वहीं सीपीआर दो तरीके से दिए जाते हैं एक छाती को दबाना और दूसरा मुंह से सांस देना जिसे माउथ टु माउथ रेस्पिरेशन कहते हैं।
कैसे दी जाती है CPR
सीपीआर देने के लिए सबसे पहले पीड़ित को किसी ठोस जगह पर लिटा दें। अब उसकी नाक और गला चेक कर ये सुनिश्चित करें कि उसे सांस लेने में कोई रुकावट तो नहीं। जीभ अगर पलट गयी है तो उसे सही जगह पर उंगलियों के सहारे लाएं। वहीं सीपीआर दो तरीके से दिए जाते हैं एक छाती को दबाना और दूसरा मुंह से सांस देना जिसे माउथ टु माउथ रेस्पिरेशन कहते हैं।
छाती को दबाना
पहली प्रक्रिया में पीड़ित के सीने के बीचोबीच हथेली रखकर पंपिंग करते हुए दबाया जाता है। एक से दो बार ऐसा करने से धड़कनें फिर से शुरू जाती है। पंपिंग करते समय दूसरे हाथ को पहले हाथ के ऊपर रख कर उंगलियो से बांध लें अपने हाथ और कोहनी को सीधा रखें।
मुंह से सांस देना
अगर पम्पिंग करने से भी धड़कने शुरू नहीं होती तो पम्पिंग के साथ मरीज को कृत्रिम यानि आर्टिफिशियल सांस देने की कोशिश की जाती है। ऐसा करने के लिए हथेली से छाती को 1 -2 इंच दबाएं, ऐसा प्रति मिनट में 100 बार करें। सीपीआर में दबाव और आर्टिफिशियल सांस का एक खास अनुपात होता है। वहीं 30 बार छाती पर दबाव बनाया जाता है तो दो बार आर्टिफिशियल सांस दी जाती है। ध्यान रहे जब भी आप किसी को आर्टिफिशियल सांस देते है तो उस समय मरीज की नाक को दो उंगलियों से दबाकर मुंह से सांस दें। ऐसा इसलिए क्योंकि नाक बंद होने पर ही मुंह से दी गयी सांस फेफड़ों तक पहुंच पाती है।
