गर्मी के मौसम के कारण देशभर में लू चल रही है। ऐसे में कई लोग बीमार भी हो रहे हैं। वहीँ डॉक्टर भी लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि हीट स्ट्रोक अपनी चरम स्थितियों में ब्रेन स्ट्रोक की वजह भी बन रहा है। खासकर बहुत ज्यादा डिहाइड्रेशन हो जाने पर ब्लड गाढ़ा हो जाता है और बॉडी में सर्कुलेशन ठीक से नहीं हो पाता है। ऐसे कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है। बता दें ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों में बोलने में कठिनाई आना और बांह में कमजोरी महसूस होना। साथ ही, डिहाइड्रेशन के हो जाना।
डिहाइड्रेशन बनता है गंभीर बीमारी की वजह
आपको बता दें ऐसे में जब किडनी फंक्शन पैरामीटर की जांच की जाती है तो वजह डिहाइड्रेशन की सामने आती है। अब चिलचिलाती गर्मी में, जब तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है, तो लोगों को हीट स्ट्रोक होने का खतरा होता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें शरीर का तापमान बढ़ता है। जो अक्सर 104°F (40°C) से ज्यादा हो जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक हीट स्ट्रोक से सेंट्रल नर्वस सिस्टम डिस्फंक्शन होने का खतरा भी है। जब शरीर का थर्मोरेगुलेटरी सिस्टम विफल हो जाता है, तो ज्यादा डिहाइड्रेशन होता है, और यह अलार्मिंग है।
रिसर्च में बात आई सामने
रिसर्च से पता चला है कि सिर्फ डिहाइड्रेशन होने से शरीर के कई काम प्रभावित होते हैं और एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के मरीजों में मृत्यु दर बढ़ जाती है, खासकर जिन्हे लार्ज वेसल ब्लॉकोज हो। यह स्ट्रोक का कारण बन सकता है और इसके जोखिम को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है कि आप खुद को हाइड्रेटेड रखें।
हो सकते हैं दो तरह के ब्रेन स्ट्रोक
बता दें ज्यादा हीट स्ट्रोक के कारण दो तरह के ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा रहता है। डिहाइड्रेशन और पानी के स्तर में कमी से ब्लड-ब्रेन बैरियर (बीबीबी) में दिक्कत आती है, जिससे हाइपरविस्कोसिटी की स्थिति बन सकती है, जहां ब्लड गाढ़ा हो जाता है और वेसल्स में क्लॉट्स बनने लगते हैं। यह स्थिति इस्केमिक स्ट्रोक, साथ ही, वेनस स्ट्रोक को जन्म दे सकती है, जो हेमोरजिक या नॉन-हेमोरजिक हो सकता है। इन स्ट्रोक का जोखिम उन मरीजों के लिए ज्यादा है जिन्हें पहले से ही हाई बीपी, डायबिटीज, स्मोकिंग, शराब का सेवन, मोटापा, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया या कार्डियक कंडिशन जैसी बीमारी हो।
सावधानी बरतें
डॉक्टर सलाह देते हैं कि लोगों को अत्यधिक गर्मी के संपर्क से बचने के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर उन लोगों को जिन्हें ये हेल्थ प्रॉबल्म्स हैं। हीट स्ट्रोक के बारे में जागरूकता और रोकथाम महत्वपूर्ण है – विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और पहले से किसी बीमारी से पीडित लोगों को इससे बचना जरूरी है।
