अभी कोविशील्ड वैक्सीन के साइड इफेक्टस को लेकर दुनिया भर में चर्चा हो ही रही थी कि इसे लेकर एक और चौकानें वाली खबर सामने आई है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी और कुछ अन्य इंटरनेशनल रिसर्चर ने अपनी स्टडी में दावा किया है कि एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड से एक नया खतरनाक ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर खतरा हो सकता है।
बता दें कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की मदद से बनाई गई ब्रिटिश स्वीडिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका की कोविड-19 वैक्सीन में हाल ही में इम्यून थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और थ्रोम्बोसिस का खतरा पाया गया। इस बीमारी में व्यक्ति के शरीर में खून के थक्के जमने लगता है। जिस वजह से कंपनी ने दुनियाभर से अपनी वैक्सीन वापस मंगाने का फैसला लिया था। ऐसे में आइए जानते हैं इस नए खतरनाक ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर के बारे में।
स्टडी में नए ब्लड क्लॉटिंग डिसॉर्डर का दावा
ऑस्ट्रेलिया की फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी और कुछ अन्य इंटरनेशनल रिसर्चर के हाल के स्टडी में एडेनोवायरस वेक्टर बेस्ड ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन से VITT एक नई बीमारी के रूप में सामने आई है। दरअसल यह एक घातक ब्लड ऑटोएंटीबॉडी में प्लेटलेट फैक्टर 4 (PF 4) को वीआईटीटी की वजह से पाया गया है। नए स्टडी के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया में फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी और दुनिया के दूसरे शोधकर्ताओं ने पाया कि एडेनोवायरस इंफेक्शन से जुड़े वीआईटीटी और क्लासिक एडेनोवायरल वेक्टर VITT दोनों में PF4 एंटीबॉडी समान मॉलिक्यूलर में है। फ्लिंडर्स के प्रोफेसर टॉम गॉर्डन ने बताया कि ‘इन डिसऑर्डर में खतरनाक एंटीबॉडी बनने का तरीका समान है। हमारे समाधान वीआईटीटी इंफेक्शन के बाद खून के थक्के जमने के सामान्य मामलों पर लागू होते हैं। ‘
ब्रिटेन में इस बीमारी की वजह मौतों का दावा
बता दें कि शोधकर्ताओं की टीम ने 2022 के एक रिसर्च में पीएफ4 एंटीबॉडी के मॉलिक्यूलर का पता लगाकर एक जेनेटिक जोखिम की पहचान की थी। यह रिसर्च एस्ट्राजेनेका के फरवरी में ब्रिटिश हाईकोर्ट में पेश की गई कानूनी दस्तावेज में स्वीकार किए जाने के बाद आया है। इस शोध में बताया गया है कि कंपनी का कोविड वैक्सीन बहुत ही दुर्लभ मामलों में थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक सिंड्रोम (TTS) की वजह बन सकता है। जिसमें खून के थक्के बन सकते हैं और प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है। हालांकि ब्रिटेन में इसकी वजह से कई मौत का दावा भी किया गया है।
