क्या आपके घर में भी नवजात शिशु यानी न्यू बोर्न बेबी है और उसे पीठ के बल लेटाते हैं। अगर हां तो आप उसे पीठ के बल लेटाने की बजाए उसे पेट के बल लेटाना शुरू कर दें। दरअसल पेट के बल नवजात शिशु को सुलाने से सेहत को काफी फायदें मिलते हैं। वहीं ऐसा करने से नवजात शिशु का विकास काफी अच्छे से होता है। तो आइए जानते हैं शिशु को पेट के बल सुलाने के फायदे और उन्हें ऐसे सुलाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि उन्हें किसी तरह क प्रॉब्लम न हो।

फ्लैट स्पॉट की समस्या नहीं होता है

अक्सर शिशु ज्यादातर समय पीठ के बल लेटे होते हैं। जिस वजह कई बार शिशु के स्कल यानी खोपड़ी की हड्डी में फ्लैट स्थान बनने लगता है जिसे पोजिशनल प्लेगियोसेफली के रूप में भी जाना जाता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप अपने शिशु को टमी टाइम दें यानी उसे पेट के बल भी थोड़ा बहुत लेटाएं। ऐसा करने से शिशु को  पोजिशनल प्लेगियोसेफली की समस्या नहीं होगी।

मांसपेशियों की सेहत के लिए लाभकारी

पेट के बल लेटाने से शिशु की गर्दन और कंधे की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। वहीं यह आपके बच्चे को तब मदद करेगा जब वह बैठना या रेंगना शुरू करेगा। इसके अलावा पेट के बल लेटने से बच्चे को अपनी कोर की मांसपेशियों को मजबूत करने में भी काफी मदद मिलती है। स्टडी के मुताबिक जो शिशु इस स्थिति में समय नहीं बिताते हैं उनके मोटर कौशल के विकास में देरी होती है। इसके अलावा इससे बच्चे को शारीरिक गतिविधियों में हेल्प मिलती है। साथ ही उनके वेस्टिबुलर सिस्टम को विकसित करने में भी मदद करता है और उन्हें दुनिया का एक अलग नजरिया देता है।

​पेट के बल शिशु को ऐसे सुलाएं

वहीँ बता दें शुरुआत में इसे दिन में दो बार सिर्फ तीन मिनट के लिए करें। जब आपके बच्चे को इसकी आदत हो जाएगी तब आप इसकी time duration बढ़ा सकते हैं। याद रखें शिशु को पेट के बल लेटाने के लिए फर्श पर बिस्तर या कंबल जरुर बिछा लें। आप चाहें तो अपने बच्चे के पास कुछ खिलौने भी रख सकते हैं, ताकि वह खेल सके।

By tnm

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